बच्चों में मोटापे का ज़िम्मेदार कौन?

मोटापा
Image caption मोटापे के अनेक कारण हैं

एक ब्रितानी शोध के अनुसार उन बच्चों में मोटापे और वज़न बढ़ने का ख़तरा बढ़ जाता है जिनका लालन-पालन उनके दादा-दादी और नाना-नानी करते हैं.

तीन साल की आयु के 12 हज़ार बच्चों पर हुए एक अध्ययन से पता चला है कि जिन बच्चों का ध्यान सारा समय उनके दादा-दादी और नाना-नानी रखते हैं उनमें वज़न बढ़ने का ख़तरा 34 प्रतिशत बढ़ जाता है.

मोटापे की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ ऑबेसिटी ने लिखा है जिन बच्चों को नर्सरी भेजा जाता है या जिनकी निगरानी के लिए आया रखी जाती है उनमें बढ़े हुए वज़न का ख़तरा नहीं देखा गया है.

ब्रिटेन में प्री-नर्सरी के एक चौथाई बच्चे या तो मोटे हैं या उनका वज़न ज़रूरत से ज़्यादा है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के वज़न को प्रभावित करने वालों कारकों पर बहुत कम शोध हुआ है.

यह सही है कि बच्चों के वज़न को उनकी ख़ुराक और शारीरिक गतिविधियां प्रभावित करती हैं.

इस मामले में आंकड़े मिलेनियम कोहोर्ट स्टडी से लिए गए हैं, जिसने नौ महीने से लेकर तीन साल के बच्चों के स्वास्थ्य पर आंकड़े जमा किए हैं. ये बच्चे 2000 और 2001 के दौरान ब्रिटेन में पैदा हुए थे.

उचित विकल्प

शोध में यह भी कहा गया है कि माता-पिता इसको अहमियत देते हैं कि उनके बच्चों की निगरानी दादा-दादी या नाना-नानी करें. वे इसे पूरे-समय माता-पिता की निगरानी का उचित विकल्प मानते हैं.

इन आंकड़ों के आधार पर यह बात सामने आई है कि जिन बच्चों की अंशकालिक देख-भाल उनके दादा-दादी या नाना-नानी ने की है, उनमें ऐसे बच्चों के मुक़ाबले अधिक वज़न बढ़ते का ख़तरा 15 प्रतिशत अधिक पाया गया है, जिनकी देखभाल सिर्फ़ उनके माता-पिता करते हैं.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की टीम ने पाया है कि जिन बच्चों की पूरी देख-भाल दादा-दादी और नाना-नानी ने की है उनमें अधिक वज़न का ख़तरा 34 प्रतिशत अधिक पाया गया है.

बच्चों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि भी उनके मोटापे का कारण है.

ज़्यादा वज़न का ख़तरा ऐसी स्थिति में भी बढ़ जाता है जब बच्चों की देख-भाल अनौपचारिक तौर पर पूरे समय उनके रिश्तेदारों और दोस्तों के ज़िम्मे हो.

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