डॉल्फ़िन में छिपा है मधुमेह का रहस्य

बोटलनोज़ डॉल्फ़िन
Image caption शोधकर्ताओं को मधुमेह बिमारी से लड़ने के लिए डॉल्फ़िन से कुछ उम्मीद है.

डॉल्फ़िन मछली में शर्करा को कम या ज़्यादा करने की अदभुत क्षमता है. इसके जीन पर एक शोध के बाद शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इससे मधुमेह रोग के इलाज़ में कुछ मदद मिल सकती है.

यूएस नेशनल मरीन मेमम्ल फ़ाउंडेशन के वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह मधुमेह रोगी पर इंसुलिन का असर होता है वैसा असर डॉल्फ़िन पर नहीं होता है.

लेकिन उनका ये भी कहना है कि डॉल्फ़िन इंसुलिन के असर को कम या ज़्यादा करने में सक्षम है. इंसुलिन एक ऐसा हॉर्मोन है जो रक्त में मौजुद ग्लूकोज़ को कम करता है, जिससे मधुमेह का स्तर कम हो जाता है.

सेन डिएगो की एक टीम ने ऐसे प्रशिक्षित डॉल्फ़िन के रक्त का नमूना लिया जो दिन में खाते रहते हैं और सारी रात भूखे रहते हैं.

वेटनरी मेडिसिन के निदेशक स्टीफेन वेन-वॉटसन का कहना है, “इस शोध में पाया गया कि रात में भूखे डॉल्फ़िन के रक्त की संरचना मधुमेह रोगी के रक्त की संरचना से मिलता है.”

उनका कहना है कि इसका मतलब ये हुआ कि जब डॉल्फ़िन भूखी रहती है तब इस पर इंसुलिन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. यानी रात को डॉल्फ़िन में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है इसलिए मधुमेह रोगी के रक्त के नमूने से मेल खाता है.

लेकिन जैसे ही डॉल्फ़िन को सुबह खाना मिलता है वैसे ही ये अपने आपको रात के बिल्कुल विपरीत अवस्था में ले आती है. यानि खाना खाने के बाद इंसुलिन काम करने लगता है और ग्लूकोज़ का स्तर घट जाता है.

इस इस खोज के आधार पर डॉक्टर वेन्न वॉटसन को उम्मीद है कि मेडिकल शोधकर्ता मधुमेह रोगी के लिए कोई इलाज ढूंढ पाएँगे.

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