इंटरनेट से बदली शादी की परिभाषा

परंपरागत भारतीय विवाह
Image caption भारत में अभी भी परंपरागत विवाह का प्रचलन सबसे अधिक है

इंटरनेट ने व्यापार की, संचार की और जानकारियों की सीमाएँ बढ़ा दी हैं. लेकिन हमारी ज़िंदगी में इंटरनेट का दख़ल इससे कहीं ज़्यादा है.

इंटरनेट ने प्यार की, व्यवहार की और रिश्तों की परिभाषा का दायरा भी बड़ा किया है.

अब दुनिया भर में लाखों लोगों की अपने साथी से मुलाक़ात इंटरनेट के ज़रिए ही हुई है. चाहे वह अल्पकालिक संबंधों के लिए हो या फिर शादी जैसे दीर्घकालिक रिश्तों के लिए.

भारत में, जहाँ परंपरागत शादियों का चलन रहा है, वहाँ इंटरनेट ने एक नया आयाम जोड़ा है.

इसने एक सुविधा दी है कि लोग अपनी पसंद के और अपने जैसे जीवनसाथी की तलाश कर लें.

आम लोगों से अलग लोग, मसलन जिनका वज़न ज़्यादा है, या जिन्हें कोई बीमारी है या जो दूसरी बार शादी कर रहे हैं, उनके लिए इंटरनेट पर खुली हैं हमसफ़र ढूँढने की ख़ास वेबसाइट्स जैसे ओवरवेटशादी डॉट कॉम, सेकेन्डशादी डॉट कॉम और डॉयबेटिकमैट्रिमोनी डॉट कॉम.

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सॉफ़्टवेयर कंपनी के मालिक अक्षय एक साल से अपने लिए जीवन साथी ढूंढ रहे हैं, लेकिन आड़े आ रहा है उनका वज़न.

अक्षय कहते हैं,"90 किलो का मेरा वज़न मुझे सामान्य वज़न वाले लोगों से अलग करता है, शादी के लिए मेरी संभावनाएँ कम करता है. लेकिन अब मैं इंटरनेट वेबसाइट ओवरवेटशादी डॉट कॉम का सदस्य बन गया हूं और अब मुझे शादी के प्रस्ताव मिलने लगे हैं."

ओवरवेटशादी डॉट कॉम वेबसाइट शुरू की अपनी बहन के साथ मिलकर, 19 साल की मेघा ने.

इंटरनेट पर मौजूद ज़्यादातर मैट्रीमोनियल वेबसाइट्स की तरह, इस वेबसाइट पर भी शादी के इच्छुक लड़के और लड़कियाँ अपने बारे में जानकारी देते हैं और इन पर दी गई औरों की जानकारी पढ़ते हैं.

अगर लड़के और लड़की की जानकारियाँ एक-दूसरे को पसंद आती हैं तो ये वेबसाइट्स, इंटरनेट के ज़रिए उनकी बातचीत यानी चैटिंग कराती है. फिर अगर वो चाहें, तो उन्हें मिलवाती भी है और परिवारों के बारे में जानकारी भी देती है.

Image caption दीप्ति और रजत को ओवरवेट डॉट कॉम ने मिलवाया और वे अधिक वज़न वालों को निराश न होने की सलाह देते हैं

मेघा बताती हैं," भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया, यूरोप और अमरिका से सैकड़ों लोग हमारी वेबसाइट के सदस्य बने हैं. लोग हमें लिखकर बताते हैं कि इस वेबसाइट का हिस्सा बनकर उन्हें कितना अच्छा लगता है, क्योंकि यहाँ उन्हें उनके मोटापे के बावजूद इज़्ज़त दी जाती है." इसी वेबसाइट के ज़रिए वर्ष 2009 में बनी संजय कुमार और मोनिका की सेहतमंद जोड़ी.

संजय कुमार बताते हैं, "वेबसाइट पर सभी मेरे जैसे हैं, तो कुछ छुपाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. मोटा होने की ग्लानि भी नहीं होती. तो हम इस सबको पीछे छोड़कर अपनी पसंद-नापसंद, शौक वगैरह के बारे में बात कर पाते हैं."

बीमारियों के बाद भी

शादी की राह पर वज़न एक स्पीडब्रेकर का काम करता है, इसका अहसास आम है लेकिन डॉयबिटालॉजिस्ट, डॉक्टर एके झींगन बताते हैं कि डॉयबेटीज़ से पीड़ित लोगों को भी अपना हमसफ़र ढूंढने में दिक़्कत आती है.

डॉक्टर झींगन कहते हैं, "डॉयबिटीज़ के मरीज़ों के लिए लोग सोचते हैं कि वो लम्बी ज़िन्दगी नहीं जीते या उनके बच्चों को उनसे ये बीमारी हो जाती है. ये सब गलत है. लेकिन इन धारणाओं की वजह से लोग डॉटबिटिज़ से पीड़ित किसी व्यक्ति से शादी नहीं करना चाहते."

Image caption स्वाति ने वेबसाइट पर दी गई जानकारी के आधार पर अपने माता पिता को समझाया कि डायबिटीज़ से पीड़ित व्यक्ति से शादी करने में कोई दिक़्कत नहीं है

डॉ झींगन ने भी मेघा का रास्ता चुना. अपनी प्रैक्टिस के साथ उन्होंने शुरु किया टाइप-वन डॉयबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए वेबसाइट - डॉयबिटिकमैट्रीमोनी डॉट कॉम.

इनकी वेबसाइट के ज़रिए उदित जैसे कई टाइप-वन डॉयबिटीज़ से पीड़ित लोगों के सामने से मानों एक दीवार गिर गई. नए विकल्प खुले, शादी हुई और उनकी पसंद से हुई.

उदित बताते हैं,"लोगों का मेरी तरफ व्यवहार अच्छा नहीं था. जब मेरी होने वाली पत्नी स्वाति ने मेरे बारे में अपने परिवार को बताया तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया जबकि मैं अच्छा कमा रहा था. कोई और दिक़्क़त नहीं थी मेरी बीमारी के सिवा."

स्वाति को डायबिटीज़ नहीं है. इसलिए उन्हें अपने परिवार वालों को इस शादी के लिए राज़ी करना एक चुनौती थी.

वे बताती हैं कि अपने परिवार वालों को इस रिश्ते के लिए मनाने में भी बेवसाइट की मदद मिली क्योंकि इस वेबसाइट पर ना सिर्फ टाइप वन डॉयबिटीज़ का डेटाबेस है बल्कि इस बीमारी के बारे में सही जानकारियाँ भी हैं.

वे बताती हैं कि शादी से पहले वे अपने माता-पिता के साथ डॉ झींगन से मिलने भी गईं.

शादी की ऐसी वेबसाइट्स की सूची में एक और नाम आता है सेकेन्डशादी डॉट कॉम का. ये ख़ास उनके लिए है जो दोबारा शादी करना चाहते हैं.

इन वेबसाइटों की लोकप्रियता और उपयोगिता बताती है कि इंटरनेट ने समाज को बदला है, उसके नज़रिए को बदला है और इस बदलाव के ज़रिए धीरे-धीरे शादी जैसी संस्था भी बदल रही है. वेबसाइट चलाने वाले मानते हैं कि जल्द ही शादी का ये निमंत्रण छोटे कस्बों तक भी पहुंच जाएगा और तब ये बदलाव ज़्यादा दिखने लगेंगे.

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