कोलाइडर का काम एक साल के लिए ठप्प

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर
Image caption लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर ने वर्ष 2008 में काम करना शुरु किया था

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर मशीन के प्रयोग को 2011 के अंत तक एक साल के लिए रोक दिया जाएगा ताकि मशीन के डिज़ाइन और सुरक्षा से जुडी समस्याओं का हल तालाशा जा सके.

इस महाप्रयोग के लिए ज़मीन में 175 मीटर नीचे 27 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई गई है, जहाँ परमाणु की टक्कर से सात खरब इलेक्ट्रोन वोल्ट ऊर्जा का प्रवाह होगा. इस महाप्रयोग का मक़सद वो परिस्थितियाँ पैदा करना है जैसा माना जाता है कि 'बिग बैंग' यानी ब्राह्मांड के निर्माण के समय थीं.

लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रयोग से पहले सूरंग का सुरक्षित होना अतिआवश्यत है.

एलएचसी के निदेशक डॉक्टर स्टीव मेयरर्स ने बीबीसी को बताया कि मशीन की ख़ामियों की वजह से ये इसे पूर्ण क्षमता तक पहुँचने के लिए दो वर्ष लगेंगे.

ब्रह्मांड के निर्माण की परिस्थितियों को समझने के लिए वर्ष 2008 से इस मशीन ने काम करना शुरु किया था, लेकिन गंभीर तकनीकी ख़ामियों की वजह से इसे कुछ महीनों के लिए रोकना भी पड़ा था.

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर दुनिया की सबसे बड़ी मशीन है और इसे वैज्ञानिक दुनिया का सबसे बड़ा प्रयोग कहा जा रहा है. लेकिन इसकी आलोचना भी हुई है.

डिज़ाइन में कमी

एलएचसी के निदेश स्टीव मायर्स का कहना है, "मुझे ये बात स्वीकार करनें में मुश्किल होती है कि इसके डिज़ाइन में कमी है. हाँ, इसके लिए अधिक संसाधन और अधिक श्रमशक्ति की ज़रूरत है, साथ ही गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण की आवश्यकता है, जिसे नज़रअंदाज़ किया गया है."

उनका कहना है, "सच बात यह है कि एलएचसी ख़ुद अपना प्रोटोटाइप (प्रतिमूर्ति) है. हम लोग तकनीक की सीमाओं आगे बढ़ा रहे हैं."

मेरयर्स के अनुसार एलएचसी जैसी मशीन सिर्फ़ और सिर्फ़ एक बार ही बनती है.

उनका कहना है कि इसकी दूसरी परेशानी पेचीदा तकनीक नहीं है, बल्कि सूरंग में सुपरकंडक्टिंग जोड़ कर जो कॉपर की शीट है चादर है, वहाँ परेशानी है.

मेरयर्स के मुताबिक़ जो कॉपर की चादरें हैं वो ऐसी तरंग को सह पाने के लिए तैयार की गई हैं कि एलएचसी का एक चुंबक काफ़ी गर्म हो जाए.

हालाँकि इंजीनियरों का मानना है कि अब ये मशीन सात खरब इलेक्ट्रोन वोल्ट के लिए सक्षम है लेकिन वो नहीं चाहते कि एक और नाकामी हो.

इसलिए उन्होंने फ़ैसला किया है कि इस मशीन को एक साल के लिए बंद करने से पहले 18 से 24 महीने तक आधी अधिकत्म क्षमता पर चलाएं ताकि 27 किलोमिटर की सूरंग में सुधार किया जा सके.

इस परियोजना पर मूल रूप से यूरोपीय संघ के 20 देश और छह ग़ैर-सदस्य देश मिलकर काम कर रहे हैं.

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