आईपीसीसी के काम की समीक्षा होगी

बान कि मून
Image caption संयुक्त राष्ट्र पर आईपीसीसी के काम की समीक्षा करने का दबाव है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान कि मून ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों से कहा है कि वो जलवायु परिवर्तन पर बने अंतरसरकारी पैनल ( आईपीसीसी) के काम की समीक्षा करने को कहा है.

उनका कहना था कि समीक्षा का काम इंटर एकेडेमी काउंसिल के समन्वय से होगा और इसमें दुनिया की कई जानी मानी संस्थाएं भी जुड़ेंगी.

आईपीसीसी की 2007 में जलवायु परिवर्तन की स्थिति पर एक बड़ी रिपोर्ट आई थी और इसमें कई ग़लतियां थी जिसके कारण आईपीसीसी पर दबाव बना हुआ है.

बान कि मून का कहना था कि मनुष्यों की गतिविधियों के कारण जलवायु पर बुरा असर पड़ने की अवधारणा में कोई त्रुटि नहीं है और अभी भी गैस उत्सर्जनों पर क़ाबू करने की ज़रुरत है.

इंटर एकेडेमी काउंसिल जल्दी ही समीक्षा के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल बनाएगा.

काउंसिल के को-चेयर रॉबर्ट जकग्राफ का कहना था कि यह प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी नहीं होगी और बिल्कुल स्वतंत्र होगी. उन्होंने बताया कि पैनल में ऐसे वैज्ञानिक होंगे जो आईपीसीसी के कार्य करने का ढंग और उससे इतर हो रहे शोधों की भी अच्छी जानकारी रखते हों.

उन्होंने कहा, ‘‘ यह पैनल आगे की दिशा तय करने की कोशिश करेगा न कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े बड़ी मात्रा में आकड़ों का परीक्षण करेगा.’’

जक्ग्राफ ने कहा, ‘‘ हम देखने की कोशिश करेंगे कि रिपोर्टें बनाने के लिए आईपीसीसी की प्रक्रिया क्या थी और वो कैसे बेहतर की जा सकती हैं ताकि हम ग़लतियों को दूर कर सकें.’’

आईपीसीसी के चेयरमैन राजेंद्र पचौरी ने इस क़दम का स्वागत किया है.

उनका कहना था, ‘‘आईपीसीसी 2007 में दी गई अपनी चौथी आकलन रिपोर्ट के साथ है लेकिन हमने पाया है कि हम और बेहतर कर सकते थे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने अपने आलोचकों की बात सुनी है और हम चाहते हैं कि हम उन सभी बातों का पालन करें जिससे हमारी रिपोर्टें और सुदृढ़ हो सकें. ’’

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के दौरान दुनिया भर की सरकारों ने आईपीसीसी के काम की समीक्षा किए जाने की मांग की थी.

इंटर एकेडेमी काउंसिल से अगस्त महीने तक अपनी रिपोर्ट को अंतिम रुप देने को कहा गया है.

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