ख़तरनाक है रक्तचाप में उतार-चढ़ाव

  • 12 मार्च 2010
रक्तचाप
Image caption रक्तचाप में उतार-चढ़ाव पर नज़र रखना अहम

शोधकर्ताओं का कहना है कि रक्तचाप में उतार-चढ़ाव दिल के दौरे के संकेत के रूप में ज़्यादा अहम है. अभी तक लगातार ज़्यादा रक्तचाप रहने को महत्ता दी जाती रही है.

मौजूदा निर्देशों के मुताबिक़ दिल के दौरे के ख़तरों को कम करने के लिए रक्तचाप को कम करने की ज़रूरत पर ध्यान दिया जाता है.

लेकिन नए शोध का मतलब ये हुआ कि डॉक्टरों को अब कभी-कभी बढ़ने वाले रक्तचाप की अनदेखी नहीं करनी चाहिए और मरीज़ों को ऐसी दवाएँ देनी चाहिए जिससे उनका रक्तचाप सामान्य बना रहे.

इस तरह के शोध की पहली कड़ी में ब्रितानी और स्वीडिश शोधकर्ताओं ने डॉक्टरों के यहाँ जाँच कराने वाले लोगों के रक्तचाप पर नज़र रखनी.

उन्होंने पाया कि जिन लोगों के रक्तचाप पर ज़्यादा उतार-चढ़ाव रहता है, उन पर उन लोगों के मुक़ाबले दिल के दौरे का ज़्यादा ख़तरा होता है, जिनका औसत रक्तचाप हमेशा ही ज़्यादा होता है.

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में क्लीनिकल न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफ़ेसर पीटर रॉथवेल ने इस शोध का नेतृत्व किया.

ख़तरा

उन्होंने बताया कि इस शोध के नतीजे का असर डॉक्टरों पर भी पड़ेगा कि जो उन लोगों का इलाज कर रहे हैं जिन पर दिल के दौरे का ख़तरा है.

रॉथवेल ने बताया, "डॉक्टरों के लिए मौजूदा दिशा-निर्देशों के मुताबिक़ एक बार हुए रक्तचाप में उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं दिया जाता और जब तक रक्तचाप लगातार ज़्यादा नहीं रहता, इलाज नहीं किया जाता. लेकिन हमारा कहना है कि एक बार हुए रक्तचाप में उतार-चढ़ाव की अनदेखी न की जाए."

उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को ऐसी दवाएँ देनी चाहिए जिससे रक्तचाप न सिर्फ़ कम हो बल्कि स्थिर भी रहे.

डॉक्टर रॉथवेल का कहना है कि लगातार रक्तचाप में उतार-चढ़ाव से धमनियाँ कड़ी हो सकती हैं और उन्हें नुक़सान भी पहुँच सकता है.

दिल के दौरे से जुड़ी संस्था द स्ट्रोक एसोसिएशन के अधिकारी जो कॉर्नर का कहना है कि इस नए शोध के आने से डॉक्टरों के दिशा-निर्देशों की समीक्षा होनी चाहिए.

संबंधित समाचार