बंदर मादाओं से ज़्यादा सीखते हैं

बंदर
Image caption असरदार मादा बंदर को नर बंदरों के मुक़ाबले ज़्यादा ऊँचा सामाजिक दर्जा हासिल होता है.

एक अध्ययन में पाया गया है कि बंदर मादाओं की तरफ़ ज़्यादा ध्यान देते हैं इसलिए वे उनसे काफ़ी सीखते भी हैं जबकि नर की तरफ़ उनका ध्यान कम जाता है.

वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका में बंदरों की एक ख़ास प्रजाति पर अध्ययन किया और पाया कि जब कोई नर बंदर उनके सामने कोई नमूना पेश करता तो उसकी तरफ़ बंदरों का ध्यान कम केंद्रित होता, जबकि अगर कोई मादा बंदर ये काम करती तो सभी बंदरों का ज़्यादा ध्यान उस तरफ़ रहता.

इतना ही नहीं, मादा बंदर के ये नमूना पेश करने के मामलों में उसे देखने वाले बंदरों ने ज़्यादा सीखा भी.

वैज्ञानिकों के एक दल ने एक बक्से को खोलने के काम में इन बंदरों की प्रतिक्रिया को परखा. इस काम को बारी-बारी से नर और मादा बंदरों से कराया गया और इस कार्य को देखने वाले बंदरों की प्रतिक्रिया और सीखने का स्तर अलग-अलग रहा. ख़ासतौर से अगर को मादा बंदर ने ये काम किया तो बाक़ी बंदरों का ध्यान से देखा और सीखा भी.

वैज्ञानिकों का यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द रॉयल सोसायटी बी में प्रकाशित हुआ है.

Image caption मादा बंदरों को ज़्यादा ज़िम्मेदार समझा गया

स्विट्ज़रलैंड के नॉश्तेल विश्वविद्यालय की जीव वैज्ञानिक एरिका वाँ डी वाल और उनकी टीम ने दक्षिण अफ्रीका में इस ख़ास प्रजाति के बंदरों के छह समूहों पर ये अध्ययन किया गया.

इस प्रयोग के तहत बंदरों को बक्से दिए गए जिनमें फल भरे थे. उन बक्सों के अंतिम सिरे पर दरवाज़े लगे हुए थे जिन पर अलग-अलग रंग लगाया गया था.

एक शुरूआती प्रदर्शन के दौरान शोधकर्ताओं ने एक दरवाज़े को अटका दिया था इसलिए इस बक्से को खोलने की पहेली हल करने का सिर्फ़ एक ही रास्ता बचा था. यानी उस दरवाज़े को खोलकर बंदर फल हासिल कर सकते थे.

बंदरों के तीन समूहों के सामने इस पहेली को सुलझाने के प्रदर्शन के लिए एक असरदार नर बंदर को चुना गया. अन्य तीन समूहों में ये काम एक असरदार मादा बंदर को सौंपा गया.

सामाजिक डोर

जीव वैज्ञानिक वाँ डी वाल का कहना था, "इस प्रक्रिया में बंदरों ने प्रयास और त्रुटि के ज़रिए बक्से को खोलना सीखा. जब उन्होंने ये सीख लिया कि दरवाज़े को किस तरह से खींचकर या खिसकाकर खोला जाए तो हमने उन्हें 25 बार ये नमूना पेश करने का काम सौंपा."

ये नमूना दिखाने के बाद ये देखा गया कि जिस समूह में मादा बंदरों ने ये काम करके दिखाया था उस समूह में ज़्यादा संख्या में बंदरों ने बक्से का दरवाज़ा खोलने की सफल कोशिश की.

वैज्ञानिकों का कहना है, "हमने देखा कि जब कोई मादा बंदर ये काम करके दिखा रही थी तो पास खड़े बंदरों ने उस काम को ज़्यादा ध्यान से देखा. लेकिन जब नर बंदर ये काम कर रहे थे तो पास खड़े अन्य बंदरों का ध्यान उस काम की तरफ़ कम रहा."

वैज्ञानिकों के अनुसार बंदरों के सामाजिक बर्ताव सीखने की प्रक्रिया में यह एक असरदार कारक नज़र आता है.

ऐसा समझा जाता है कि असरदार मादा बंदर को कोई काम करते देखना और उससे सीखना बंदरों के लिए एक काफ़ी लाभदायक हो सकता है.

नर बंदरों की ये प्रवृत्ति है कि वो यहाँ-वहाँ घूमते रहते हैं और मादा बंदरों की तलाश में दूसरे समूहों में भी चले जाते हैं मगर मादा बंदरों में देखा गया है कि वो उसी समूह में रहना पसंद करती हैं जिनमें उनका जन्म होता है.

इन वैज्ञानिकों का कहना है, "मादा बंदरों को किसी भी समूह का ज़्यादा महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता है जिनका सामाजिक दर्जा और रुतबा नर बंदरों के मुक़ाबले ऊँचा होता है. इतना ही नहीं, मादा बंदरों को अपने निवास स्थल के आसपास खाने-पीने की चीज़ों की मौजूदगी के बारे में नर बंदरों के मुक़ाबले ज़्यादा जानकारी होती है."

संबंधित समाचार