श्वास नली का सफल प्रतिरोपण

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption चिकित्सा जगत में तीसरी बार श्वास नली का प्रत्यारोपण किया गया है

ब्रिटेन में 10 साल के लड़के की श्वास नली का उसके ख़ुद के स्टेम सेल से सफल प्रतिरोपण किया गया है.

चिकित्सा जगत में इस ऑपरेशन को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. क़रीब नौ घंटे तक ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल में चले इस ऑपरेशन में श्वास नली के लिए स्टेम सेल इस लड़के के शरीर से ही लिया गया.

हालाँकि श्वास नली का दुनिया में पहला प्रतिरोपण 2008 में स्पेन में किया गया था, लेकिन इस ऑपरेशन में श्वास नली के बहुत छोटे हिस्से का प्रतिरोपण कर दिया गया था.

डॉक्टरों के कहना है कि लड़के के स्वास्थ्य में तेज़ी से सुधार हो रहा है और सामान्य रूप से सांस ले रहा है.

उपलब्धि

इस लड़के को जन्म से ही सांस लेने में मुश्किल होती थी और इसकी वजह थी उसकी श्वास नली का बेहद संकरा होना. डॉक्टरों के अनुसार जन्म के समय लड़के की श्वास नली सिर्फ़ एक मिलीमीटर चौड़ी थी.

डॉक्टरों ने इस लड़के की श्वास नली का रास्ता चौड़ा करने के लिए पिछले साल नवंबर में भी ऑपरेशन किया था, लेकिन ये सफल नहीं हो सका और मरीज़ को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

इसके बाद डॉक्टरों ने लड़के के बोन मैरो (मेरु रज्जा) से स्टेम सेल लेकर धातु की श्वास नली के अंदर और बाहर प्रत्यारोपित करने का निर्णय लिया. डॉक्टरों को भरोसा है कि अगले महीने तक स्टेम सेल स्पेशलाइज़्ड सेल में बदल जाएगी.

दो साल पहले दो बच्चों की माँ 30 वर्षीय क्लाउडिया कास्टिलो स्टेम सेल से बनी श्वास नली को प्रत्यारोपित करने वाली पहली शख्स थीं. तपेदिक के चलते उनकी श्वास नली ख़राब हो गई थी.

यूनीवर्सिटी कॉलेज लंदन के मार्टिन ब्रिशेल इस उपलब्धि को 'मील का पत्थर' मानते हैं. वो कहते हैं, "पहली बार किसी बच्चे का उपचार स्टेम सेल से किया गया है और ये अब तक की सबले लंबी प्रत्यारोपित श्वास नली है."

ब्रिस्टल यूनीवर्सिटी के टिश्यू इंज़ीनियरिंग विभाग से जुड़े प्रोफ़ेसर एंथनी हॉलेंडर कहते हैं, "इसका सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि इसके ज़रिये उपचार बहुत ज़ल्द और कम कीमत पर हो सकता है."

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