इंटरनेट बना खतरा

ध्रुवीय भालू
Image caption पोलर बियर के भी लुप्त होने का ख़तरा बढ़ गया है

दुर्लभ प्रजातियों के लिए इंटरनेट बहुत बड़ा खतरा बन कर सामने आया है.

क़तर की राजधानी दोहा में दुर्लभ प्रजातियों की ख़रीद-फ़रोख़्त विषय पर आयोजित सम्मेलन में कहा गया कि आजकल इंटरनेट के माध्यम से कोई भी चीज़ खरीदना और बेचना पहले के मुक़ाबले बहुत आसान हो गया है, फिर चाहे वो शेर का ज़िंदा बच्चा हो या ध्रूवीय भालू की खाल.

सम्मेलन में 175 देशों के प्रतिनिधि ने हिस्सा लिया.

इंटरनेशनल फंड फ़ोर एनिमल वेलफेयर के पॉल टॉड का कहना था, “संरक्षित प्रजातियों के वैश्विक व्यापार में इंटरनेट की बहुत बड़ी भूमिका है.”

उनका कहना है कि इंटरनेट पर हज़ारों लुप्तप्राय प्रजातियों का लगातार व्यापार हो रहा है. चूंकि इंटरनेट की बाज़ारु दुनिया बहुत बड़ी है इसलिए खरीदार और बेचने वाले दोनों अपनी पहचान छुपा लेते हैं और इसका उन्हें फ़ायदा मिलता है.

गैरक़ानूनी व्यापार पर नज़र रखने वाली एजेंसियों का कहना है कि ये व्यापार कितने का है इसका सही अंदाजा लगाना मुश्किल है. उनका कहना है कि इस व्यापार का सबसे बड़ा बाज़ार अमरीका है, लेकिन यूरोप, चीन, रूस और ऑस्ट्रेलिया भी अहम भूमिका में है.

प्रतिनिधियों ने ध्रुवीय भालूओं, ब्लूफ़िन टूना और दुर्लभ मोतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर रोक लगाने पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया.

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