मुर्गियों की मदद से मानव इलाज

मुर्ग़ी
Image caption ट्रांसजेनिक मुर्ग़ी की मदद से अनके बीमारियों का इलाज मुमकिन होगा

भारत विश्व का ऐसा छठा देश बन गया है जिसने ट्रांसजेनिक चिकन या मुर्गी पैदा करने की आधुनिक तकनीक तैयार कर ली है.

वैज्ञानिकों की राय में भारत की यह सफलता देश के बायो-मेडिकल के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति ला सकती है और मानव के कई बड़े रोगों के इलाज में सहायक हो सकती है.

तरुण कुमार भट्टाचार्य के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल ने दो वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद यह कामयाबी हासिल की है.

यह ट्रांसजेनिक चिकन हैदराबाद स्थित प्रोजेक्ट डाइरेक्टॉरेट ऑन पॉल्ट्री में पैदा की गई है.

लेकिन सवाल यह है की यह ट्रांस्जेनिक चिकन क्या है? उसे किस तरह तैयार किया गया है और इसका क्या फ़ायदा होगा?

इलाज में सहायक

तरुण कुमार भट्टाचार्य के अनुसार ट्रांसजेनिक चिकन एक ऐसी मुर्गी है जिसमें ऐसे जीन होंगे जो आम तौर पर मुर्गियों में नहीं बल्कि किसी दूसरे जीवों होते हैं.

भट्टाचार्य की टीम ने 'जेली फिश' के एक ख़ास जीन को लेकर नया चिकन तैयार किया है.

भट्टाचार्य ने बताया, "इस प्रयोग के लिए हम ने जेली फिश का एक ऐसा जीन लिया जिससे हरे रंग की रोशनी निकलती है और उसे आसानी के साथ देखा जा सकता है. यह जीन हमने एक मुर्गे के वीर्य में वैज्ञानिक ढंग से मिलाया और फिर कृत्रिम ढंग से उसका मुर्गीमें गर्भाधान किया. जिससे जो अंडे मिले उनसे पैदा होने वाली मुर्ग़ियां ट्रांसजेनिक चिकन निकली, क्योंकि उनमें जेली फिश का हरे रंग का जीन मौजूद था."

ये तकनीक अबतक केवल पांच विकसित देशों के पास है जिनमें अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, जापान और चीन शामिल हैं.

बड़ी सफलता

Image caption तरुण कुमार भट्टाचार्य के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल ने यह तकनीक विकसित की है

प्रोजेक्ट डाइरेक्टॉरेट ऑन पॉल्ट्री के निदेशक आरपी शर्मा के अनुसार यह एक बहुत बड़ी सफलता है.

वे कहते हैं, "इस सफलता का असल महत्व तब है जब हम कैंसर, एड्स और मधुमेह जैसी ख़तरनाक बीमारियों के इलाज के लिए दवाएं और टीका तैयार करने में कामयाब हो जाएं."

डॉक्टर भट्टाचार्य का कहना था कि स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए मानव शरीर में इम्मुनो ग्लोबीन होता है और इसे ट्रांसजेनिक चिकन में तैयार किया जा सकता है. इसके टीके की मांग को भी पूरा किया जा सकता है.

इसी तरह हिमोफिलिया के लिए ह्यूमैन फाक्टर-9 और कैंसर, पार्किंनसन जैसे रोगों के लिए ज़रूरी चीज़ें ट्रांसजेनिक चिकन में तैयार की जा सकती हैं.

जिस प्रयोग में सफलता मिली है उस में 263 चूजे पैदा किए गए है, लेकिन उनमें से केवल 16 में ही वो जीन मिला जो जेली फिश से लिया गया था.

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