डूब नहीं फैल रहे हैं सागर के द्वीप

Image caption अध्ययन में 27 द्वीपों के 60 वर्ष के इतिहास पर नज़र रखी गई

एक नए भौगोलिक अध्ययन का दावा है कि प्रशांत महासागर में निचले समुद्रतल में पड़नेवाले कई द्वीप डूब नहीं रहे बल्कि उनका विस्तार हो रहा है.

अध्ययन के अनुसार टूवालू, किरिबास और माइक्रोनेशिया गणराज्य ऐसे द्वीपीय देश हैं जिनका आकार मूँगे की चट्टानों और के मलबों और समुद्र के भीतर कणों आदि के जमा होने से बनी अवसादी चट्टानों के कारण बढ़ गया है.

न्यू साइंटिस्ट पत्रिका में छपे इस अध्ययन का अनुमान है कि इन द्वीपों का अस्तित्व अगले सौ वर्षों तक भी बना रहेगा.

हालाँकि भले ही ये द्वीप ना डूबें लेकिन आगे चलकर ऐसे द्वीप बसने लायक रहेंगे कि नहीं, ये निश्चित नहीं है.

हाल के समय में निचले समुद्र तल में पड़नेवाले प्रशांत महासागर के कई द्वीपों के निवासियों को ये चिंता सताती रही थी कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से उनका द्वीप नक्शे से ग़ायब हो जाएगा.

अध्ययन

इस अध्ययन के दौरान 27 द्वीपों का पिछले 60 वर्षों का लेखा-जोखा लिया गया जिसके लिए पुरानी तस्वीरों और उपग्रह से लिए गए चित्रों का सहारा लिया गया.

भूगर्भशास्त्रियों ने पाया कि 80 प्रतिशत द्वीप जैसे थे वैसे ही रहे या उनका आकार बढ़ गया और उनमें भी कुछ तो बहुत ही अधिक बढ़ गए.

अध्ययन दल में शामिल ऑकलैंड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रोफ़ेसर पॉल केंच का कहना है कि इन द्वीपों का अस्तित्व समाप्त हो जाए, इसका ख़तरा निकट भविष्य में बिल्कुल नहीं है.

उन्होंने कहा, इन देशों के बारे में वो निराशाजनक सोच बिल्कुल ग़लत है. हमारे पास इस बात के प्रमाण हैं कि ये द्वीप अगले सौ साल तक रहेंगे. तो उनको अपने देश से भागने की कोई ज़रूरत नहीं है.

लेकिन ये पता चलने के बावजूद कि ये द्वीप निकट भविष्य में नहीं डूबेंगे, अध्ययन का मतलब ये नहीं है कि आगे चलकर ये द्वीप लोगों के रहने लायक भी रहेंगे ही.

वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इन द्वीपों पर रहनेवाले लोगों के जन-जीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है.