स्वाइन फ़्लू का भारतीय टीका तैयार

स्वाइन फ़्लू का टीका
Image caption स्वाइन फ़्लू के लिए कोई भारतीय टीका उपलब्ध नहीं था

पिछले एक साल में भारत में डेढ़ हज़ार से अधिक जानें ले चुके स्वाइन फ़्लू यानी एच1एन1 इंफ़्लूएंज़ा पर लगाम लगाने की उम्मीदों के साथ पहला स्वदेशी टीका जारी कर दिया गया है.

कैडिला हेल्थकेयर ने इसे तैयार किया है. वैक्सीफ्लू-एस वैक्सीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने खुद को टीका लगवाकर इसे जारी किया.

यह टीका शुक्रवार से बाज़ार में उपलब्ध हो जाएगा और इसकी कीमत 350 रूपये है जो अन्य उपलब्ध वैक्सीन की अपेक्षा बहुत कम है.

कैडिला हेल्थकेयर का दावा है कि इसे भारतीय परिस्थितियों में पूरी तरह टेस्ट किया गया है और यह बहुत कारगर साबित होगा.

बच्चों और महिलाओं के लिए नहीं

सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में इंफ़्लूएंज़ा से लड़ने का वैक्सीन बनाने के लिए बुनियादी सुविधाएँ थी ही नहीं.

मई 2009 में इंफ़्लूएंज़ा एच1एन1 के भारत में बड़े पैमाने पर फैलने और 11 जून 2009 को सरकार के इसे महामारी घोषित करने के बाद ही इस दिशा में कोई कदम उठाया गया.

स्वास्थ्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने टीके को जारी करते हुए इसे बहुत बड़ी उपलब्धि बताया लेकिन भारत में स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता पर निराशा ज़ाहिर की.

एच1एन1 के फैलने के एक साल बाद यह सफलता हाथ लगी है लेकिन केवल 18 से 60 साल के आयु वर्ग वाले ही इसका इस्तेमाल डॉक्टरी सलाह से कर सकेंगे.

शुरूआती दौर में बच्चे और महिलाएँ इसका प्रयोग नहीं कर सकेंगे. तीन और कंपनियां- सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, भारत बायोटेक और पनेशिया बायोटेक भी इस दिशा में काम कर रही हैं.

उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी अपना टीका बाज़ार में पेश कर देगी.

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