सौर विमान ने भरी पहली उड़ान

सौर विमान की पहली उड़ान
Image caption विमान का वज़न एक गाड़ी जितना ही है

सौर ऊर्जा से चलने वाले एक विशेष विमान को 24 घंटे की उड़ान के दौरान परखा जा रहा है.विमान ने स्विट्ज़रलैंड से अपनी उड़ान भरी है

सौर विमान के 24 घंटे के परीक्षण का मक़सद ये देखना है कि जब सूर्य की रोशनी नहीं होती तब ये विमान अपने पंख पर लगे सोलर सेल में जमा सौर शक्ति से उड़ पाता है या नहीं.

ये एचबी – एसआईए विमान है. इस विमान का वज़न उतना ही है जितना एक गाड़ी का होता है.लेकिन उसके पंख का फैलाव बिलकुल किसी बड़े विमान जितना है.

सौर विमान को पिछले हफ्ते उड़ान भरनी थी लेकिन किसी तकनीकी ख़राबी के कारण उड़ान को स्थगित करना पड़ा था.

बुधवार देर रात तक विमान के पायलट आंद्रे बॉर्शबर्ग इसे लगभग 28,000 फीट की ऊंचाई तक ले जाने वाले हैं.

अंधेरे में इसकी सौर बैटरी की क्षमता परखने के लिए ये फैसला उसी वक्त लिया जाएगा कि क्या बैटरी में जमा पावर की मदद से विमान को उड़ाया जाए या नहीं.

बॉर्शबर्ग और उनके व्यापार के साथी बर्ट्रैंड पिकार्ड के सोलर इम्पल्स प्रोजेक्ट में इस तरह के विमान को बनाने का ये पहला क़दम है.

Image caption बॉर्शबर्ग और बर्ट्रैंड पिकार्ड सात साल से इस विमान पर काम कर रहे हैं

ये विमान 12,000 सेल्स की मदद से चलता है.

सौर ऊर्जा का भविष्य

इससे पहले पिकार्ड ने पहली बार 1999 में एक गुब्बारा बनाकर बिना रुके धरती का चक्कर लगाया था.

दरअसल बॉर्शबर्ग और बर्ट्रैंड पिकार्ड मिलकर ये साबित करना चाहते हैं कि उड्डयन के क्षेत्र में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है.

विमान में इस्तेमाल किया गया सामान काफी हल्का है और इसमें बेहतर क़िस्म के सोलर सेल, बैटरी, मोटर और प्रोपेलर लगाए गए हैं ताकि विमान हवा में ठहर सकें.

इस विमान को पिछले साल जनता के सामने लाया गया था. तब से विमान के दिन में परीक्षण किए जा रहे थे. पहली बार सात अप्रैल को विमान का पूरे दिन का सफल परीक्षण किया गया था .

एचबी-एसआईए के बाद एचबी-एसआईबी लाया जाएगा जो हर लिहाज़ से इससे बेहतर होगा.

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