मधुमक्खियां सुबह में अधिक चतुर

मधुमक्खी

हमारे बडे़ बुजुर्ग अक्सर यह सलाह देते हैं कि सुबह में उठने का फल मीठा होता है. लेकिन मधुमक्खियों पर किए गए एक शोध से भी यह बात साबित होती है.

जर्मनी के वैज्ञानिकों के शोध से पता चलता है कि सुबह के समय मधुमक्खियां अधिक चतुर होती हैं.

अध्ययन के मुताबिक भोर में मधुमक्खियां अच्छे गंध वाले फूलों की पहचान बेहतर तरीके से कर सकती हैं. इस तरह वे भोर में बेहतर कुशलता के साथ फूलों से शहद इकट्ठा कर सकती हैं.

अध्ययन का प्रकाशन बिहेवियरल इकोलॉजी एंड सोशियोबायोलॉजी में किया गया है. शोध करने वाली टीम ने एक हज़ार मधुमक्खियों पर शोध किया.

सुबह की तेज़ी

मधुमक्खियों की क्षमता का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों ने एपिस मेलिफेरा प्रजाति की एक हज़ार मधुमक्खियों को इकट्ठा किया.

इस प्रजाति की मधुमक्खियां शहद इकट्ठा करने में माहिर मानी जाती हैं.

नए-नए गंध की जानकारी देने के लिए मधुमक्खियों को दिन के अलग-अलग समय पर प्रशिक्षित किया गया. इसके बाद प्रशिक्षण किया गया कि क्या वे सही गंध की पहचान कर पाती हैं?

शोध दल का नेतृत्व जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ कोंसटांज़ के प्रोफ़ेसर जियोवानी गैलिज़िया ने किया.

बेहतर क्षमता

शोध में पाया गया कि मधुमक्खियों को सुबह प्रशिक्षित करने पर उनकी कुशलता अच्छी थी. सुबह में उनमें यह पता लगाने की क्षमता बेहतर थी कि फूलों की कौन सी गंध शहद इकट्ठा करने के लिहाज से बेहतर है.

इंसेक्ट बिहेवियर के विशेषज्ञ और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के वैज्ञानिक डॉक्टर नाइजेल रैनी ने इस शोध को काफ़ी अहम बताया.

बीबीसी से बातचीत से उन्होंने बताया, "मधुमक्खियां हमारे जीवन में काफ़ी अहम हैं. उनके परागण से न केवल फसलों की क्षमता बढ़ती है, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता भी बनी रहती है."

हालांकि काफ़ी समय पहले यह पता लगाया जा चुका है कि मधुमक्खियों की क्षमता दिन के अलग-अलग समय पर अलग-अलग होती है.

लेकिन शोधकर्ताओं के मुताबिक यह ऐसा पहला अध्ययन है जिससे साबित होता है कि सुबह मधुमक्खियों की पराग इकट्ठा करने की क्षमता बेहतर होती है.

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