अरबी पढ़ पाना मुश्किल क्यों?

लेबनान में अरबी पढ़ते बच्चे
Image caption लेबनान में अरबी भाषा के प्रोत्साहन के लिए बाक़ायदा त्योहार मनाया जाता है

इसराइल के वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्होंने पता लगा लिया है कि अरबी भाषा को सीखना कठिन क्यों है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ हाइफ़ा के वैज्ञानिकों का कहना है कि जब आप किसी भाषा को पढ़ना शुरू करते हैं तो मस्तिष्क के दोनों हिस्सों का इस्तेमाल होता है लेकिन अरबी सीखते समय इस कोशिश का फ़ायदा नहीं होता है.

बीबीसी की विज्ञान संवाददाता केटी एलकॉक के अनुसार शोधार्थियों ने कुल 40 लोगों पर अध्ययन किया और इसके नतीज़े को न्यूरो-साइकोलॉजी में प्रकाशित किया.

जब कोई व्यक्ति अरबी सीखता है तो इस बात के लिए अधिक कोशिश करनी पड़ती है कि कौन सा अक्षर क्या है, और किस अक्षर पर कौन सी ध्वनि निकलती है.

शोध दल की अगुवाई करने वाले ज़ोहर इविएटर ने कहा, "अरबी की कुछ खास विशेषता है जिसकी वजह से मस्तिष्क का दाहिना हिस्सा सीखने की प्रकिया में शामिल नहीं हो पाता है. जबकि कुछ भी नई चीज़ सीखने की प्रक्रिया में मस्तिष्क के इस हिस्से की भूमिका काफ़ी अधिक होती है."

शोध में शामिल 40 छात्रों में से कुछ केवल हिब्रू बोल पाते थे जबकि कुछ अच्छी तरह से अरबी पढ़ और लिख सकते थे.

शोध

मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा अक्षरों को पढ़ पाता है, इसका पता लगाने के लिए शोधार्थियों ने स्क्रीन के एक हिस्से की ओर सेकिंड के दसवें हिस्से के लिए अक्षरों को दिखाया.

जब आंखें मामूली क्षण के लिए कोई चीज देखती हैं, और अगर यह स्क्रीन के केवल एक हिस्से की तरफ़ है, तो मस्तिष्क का केवल एक गोलार्द्ध ही सक्रिय होकर इस तस्वीर को देख पाता है.

शोधकर्ताओं ने इस बात की गणना की कि कौन छात्र कितनी तेज़ी से और कितना सटीक होकर इस अक्षर को पढ़ पाता है- पहले हिब्रू में और उसके बाद अरबी में.

सभी छात्र हिब्रू को अच्छी तरह से पढ़ सकते थे. अक्षरों को हिब्रू में बताने के लिए सभी छात्रों ने मस्तिष्क के बाएं और दाहिने दोनों ही गोलार्द्धों का इस्तेमाल किया.

यही नतीज़े अंग्रेज़ी के अक्षरों को पढ़ने में भी सामने आए. अरबी की तुलना में अंग्रेज़ी और हिब्रू के अक्षरों को अलग-अलग बता पाना कहीं अधिक आसान था.

ज़्यादा कठिन

छात्र जब अरबी अक्षरों को पढ़ने की कोशिश करते, तो उन्हें देखने से ऐसा संकेत मिलता कि अरबी भाषा के अक्षरों को पढ़ पाना कहीं ज़्यादा कठिन है.

अच्छी अरबी पढ़ने वाले छात्रों ने अक्षरों को अरबी में बताने में मस्तिष्क के केवल बाएं हिस्से का इस्तेमाल किया.

शोधकर्ताओं का मानना है कि शोध के नतीज़े से इस बात की और अधिक जानकारी मिल सकती है कि जब कोई अरबी अक्षरों को बोलना सीखना चाहता है तो क्यों दिक्कतें पेश आती हैं.

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