क्या गोरिल्ला से मिला मलेरिया

गोरिल्ला

अबतक ये माना जाता था कि इंसानों को होनेवाले मलेरिया के लिए ज़िम्मेदार परजीवी चिंपैंज़ी से मानव में तब आए थे जब मानव के विकास की प्रक्रिया के दौरान इंसानों और चिंपैंज़ियों के पूर्वज एक थे.

लेकिन अमरीका, यूरोप और तीन अफ़्रीकी देशों के वैज्ञानिकों को अब चिंपैंज़ी के बजाय गोरिल्ला के मल में मलेरिया के परजीवी मिले हैं.

वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी गोरिल्ला में पाए गए परजीवी इंसानों में पाए गए परजीवी से सबसे ज़्यादा मेल खाते हैं.

मलेरिया का कारण एक परजीवी है जो 'प्लासमोडियम' के नाम से जाना जाता है और मच्छरों के ज़रिए इंसानों तक पहुँचता है.

इसका सबसे आम स्वरूप, 'प्लासमोडियम फ़ैलसिपॉरम' ख़तरनाक माने जानेवाले दिमागी मलेरिया के लिए ज़िम्मेदार है.

सिर्फ़ अफ़्रीका में ही दिमागी मलेरिया से आठ लाख लोग हर साल मरते हैं.

डीएनए की समीक्षा

Image caption मलेरिया मच्छरों के ज़रिए इंसानों तक पहुँचता है.

अमरीका के बर्मिंघम स्थित अलाबामा विश्वविद्यालय की बीट्रिस हान उस दल की सदस्य हैं जो इंसानों और बंदर की जाति के जानवरों के बीच एचआईवी और उससे संबंधित संक्रामक रोगों पर शोध कर रहा है.

उनका कहना है कि अबतक हुए शोध से पता चलता है कि मलेरिया के परजीवी गोरिल्ला से ही आए हैं.

बीट्रिस हान का कहना है, "अब तक इस विषय पर जो शोध हुए हैं वो सिर्फ़ चिंपैज़ियों पर ही किए गए हैं. इसलिए गोरिल्ला में पाए जानेवाले ये परजीवी मिले ही नहीं थे."

ये शोधकर्ता अपने निष्कर्ष को विज्ञान के क्षेत्र की प्रतिष्ठित पत्रिका 'नेचर' में छापते हैं.

अभी इस विषय पर शोध हो ही रहा है कि क्या जानवरों की नई प्रजातियों से नए संक्रमण अब भी हो रहे हैं या नहीं.

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