मलेरिया निरोधक कार्यक्रमों पर ख़तरा

मच्छर
Image caption मलेरिया फैलाने वाले मच्छर ग़रीब देशों मे सबसे ज़्यादा पनपते हैं

ब्रिटेन और अफ़्रीका के विशेषज्ञों की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व भर में मलेरिया निरोधक अभियान के लिए वांछित रक़म में 60 फ़ीसदी की कमी है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि मलेरिया से सबसे ज़्यादा प्रभावित 93 देशों में से केवल 21 को ही मलेरिया की रोकथाम के लिए रक़म मिल पाई है.

इन 21 देशों में से 12 अरब देश हैं.

जबकि निजेर और सिएरा लियोन जैसे 50 और देश ऐसे हैं, जिन्हें अपने यहां मलेरिया की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिल रही.

लांसेट चिकित्सा पत्रिका में छपे लेख में विशेषज्ञों का कहना है कि अफ़्रीकी देशों के मलेरिया कोष में बढ़ोतरी की गई है लेकिन अन्य देशों में मलेरिया से बचाव के लिए अभी अरबों डॉलरों की ज़रूरत है.

‘रोल बैक मलेरिया कैम्पेन’ संस्था का कहना है कि इसी साल लगभग 5 अरब डॉलर की ज़रूरत है.

ऑक्सफ़ोर्ड विश्विद्यालय के प्रोफ़ैसर बॉब स्नो और कीनिया के केन्याटा नेशनल हॉस्पिटल के नेतृत्व में काम कर रहे इस शोध दल ने पाया कि सन 2007 से हालांकि इस अभियान के लिए वित्तीय सहायता में 166 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उनका कहना था, "मलेरिया अभियान के लिए दी जाने वाली रक़म में थोड़ी सी भी कटौती की गई तो उन देशों को फिर से मलेरिया के प्रकोप का ख़तरा हो सकता है जहां सन 2002 के बाद से मलेरिया कोष की मदद से लोगों को पूरी सुरक्षा दी जा रही है."

प्रोफ़ैसर स्नो का कहना था, "इन देशों में इस वित्तीय मदद को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है, वरना सन 2002 के बाद से जो लगभग 10 अरब डॉलर की रक़म मलेरिया अभियान में लगाई जा चुके हैं वह सब बेकार हो जाएगी."

प्रोफ़ैसर स्नो का ये भी कहना था, "अगर मलेरिया पर नियंत्रण की वैश्विक महत्वाकांक्षा को पूरा करना है तो ग़रीब देशों और मलेरिया का ख़तरा सर पर लिए हुए उनकी आबादी को इस अभियान के केंद्र में रखना होगा."

रिपोर्ट के लेखकों का ये भी कहना था कि चीन और भारत जैसे देश, जो अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम चलाने में सक्षम हैं, उन्हें चाहिए कि वे इस अभियान के लिए पैसा लेने के बजाए मलेरिया कोष में अपना योगदान दें, जिससे वित्तीय स्थिति में कुछ सुधार आ सके.

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