दुनिया से खत्म हुआ 'रिंडरपेस्ट' का जीवाणु

दुधारु पशु
Image caption ‘रिंडरपेस्ट’ से मध्यपूर्व, अफ्रीका और एशिया में हजारों दुधारों पशुओं की मौत हो गई थी.

संयुक्त राष्ट्र के लिए काम कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने पशुओं में प्लेग जैसी बीमारी के लिए ज़िम्मेदार ‘रिंडरपेस्ट’ के जीवाणु को दुनिया से ख़त्म कर दिया है.

‘रिंडरपेस्ट’ नामक बीमारी ने एक समय में मध्यपूर्व, अफ्रीका और एशिया में महामारी का रुप ले लिया था. इसके कारण हज़ारों की संख्या में दुधारू पशुओं की मौत हो गई थी.

उम्मीद जताई जा रही है कि 'स्मॉलपॉक्स' के बाद ‘रिंडरपेस्ट’ दूसरी ऐसी बीमारी है जिसके जीवाणु को खत्म करने में इंसान ने कामयाबी पाई है.

सफ़ाया

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) का कहना है कि ये सफलता दुनियाभर में किए जा रहे प्रयासों के कारण मिली है और अब इस मिशन पर स्थाई रूप से काम बंद किया जा रहा है.

संगठन का कहना है कि उसे इस बात का पूरा विश्वास है कि दुनिया के जिन हिस्सों में ये बीमारी पाई जाती है वहां से इसका पूरी तरह सफ़ाया हो चुका है.

19वीं सदी के अंत में अफ्रीका में इस बीमारी के जीवाणु पाए गए और जिसकी चपेट में आकर अफ्रीका के 80 से 90 फ़ीसदी दुधारु पशुओं की मौत हो गई थी.

ऐतिहासिक

पशुओं के इलाज और उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए किए जा रहे प्रयासों के मद्देनज़र इस कामयाबी को ऐतिहासिक माना जा रहा है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि अपनी जीविका के लिए पूरी तरह पशुओं पर निर्भर किसानों और ग़रीब देशों को इससे काफ़ी लाभ होगा.

जीवाणु को ख़त्म करने की परियोजना से जुड़े डॉक्टर जॉन एंडरसन का कहना है, ''बीमारियों को जड़ से खत्म करने की कोशिश में जुटे लोग लंबे समय तक ये मानते थे कि दुनिया से किसी बीमारी को ख़त्म करना एक सपने जैसा है, ‘रिंडरपेस्ट’ को ख़त्म कर हमने इस सपने को सच कर दिखाया है.''

मिलेजुले प्रयास

इस क़ामयाबी की औपचारिक घोषणा अगले वर्ष तक की जाएगी.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना को सफल बनाने के लिए ग्रामीण और आदीवासी इलाकों में लोगों को वैज्ञानिक दल के साथ जोड़ा गया. सभी इलाकों का दौरा कर चरवाहों और किसानों की मदद से पशुओं को टीके लगाए गए.

दल के सदस्य डॉक्टर बैरन के अनुसार, ''ये कामयाबी इस मायने में भी खास है कि ये दिखाती है कि दुनियाभर से लोग जुड़ जाएं तो कुछ भी असंभव नहीं.''

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