चंद्रशेखर की जन्म शती

नोबेलप्राइज़.ऑर्ग के सौजन्य से
Image caption भारतीय मूल के जाने माने खगोल भौतिक विज्ञानी की जन्म शती

आज भारत के जाने-माने खगोल भौतिकविज्ञानी सुब्रमण्यन चंद्रशेखर की सौवीं जयंती है.

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित चंद्रशेखर की गिनती बीसवीं शताब्दी के महान खगोल भौतिक विज्ञानियों में की जाती है.

उनका जन्म लाहौर में हुआ था लेकिन फिर उनका परिवार दक्षिण भारत चला आया.

उनकी आरंभिक शिक्षा हिंदू हाइस्कूल में हुई और फिर मद्रास के प्रेसिडेंसी कॉलेज से उन्होने विज्ञान की स्नातक उपाधि हासिल की.

उसके बाद उन्हे ब्रिटेन के केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए सरकारी वज़ीफ़ा मिला.

भारत से ब्रिटेन के जहाजी सफ़र के दौरान उन्होने खगोल भौतिकी के एक महत्वपूर्ण मान की गणना की जिसे 'चंद्रशेखर लिमिट' के नाम से जाना जाता है.

ब्रिटेन के सुप्रसिद्ध खगोल भौतिकविज्ञानी सर आर्थर ऐडिंगटन ने इस मान का मज़ाक उड़ाया जिससे चंद्रशेखर का युवा मन बहुत आहत हुआ और वो 1937 में अमरीका के शिकागो विश्वविद्यालय चले गए.

अमरीका जाने से पहले उन्होने ललिता दोरइस्वामी से विवाह किया और शेष जीवन अमरीका में ही रहे हालांकि भारत से निरंतर संबंध बनाए रखा.

भारत की आज़ादी के बाद होमी भाभा ने उन्हे टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ंडामेंटल रिसर्च आने का निमंत्रण दिया लेकिन उन्होने उसे स्वीकार नहीं किया.

अक्टूबर 1953 में उन्होने और उनकी पत्नी ने अमरीका की नागरिकता ले ली.

अस्सी के दशक में चंद्रशेखर ने भारत लौटने की इच्छा व्यक्त की लेकिन 1983 में जब उन्हे नोबेल पुरस्कार मिला तो उन्होने अमरीका में बने रहना ठीक समझा.

वैज्ञानिक योगदान

चंद्रशेखर का वैज्ञानिक योगदान दशकों में फैला है. उन्होने सैद्धांतिक खगोल भौतिकी के कई क्षेत्रों में काम किया जैसे तारकीय रचना, श्वेत वामन तारे का सिद्धांत, तारकीय गतिविज्ञान और ब्राउनियन मोशन का सिद्धांत.

लेकिन उनके सबसे महत्वपूर्ण काम को श्वेत वामन तारे की 'चंद्रशेखर सीमा' के नाम से जाना जाता है.

ये सीमा तब लागू होती है जब किसी तारे का परमाणु ईंधन चुक जाता है.

तारे के अंतिम लाखों वर्ष बड़े ही अशांत होते है जब बहुत से तारे अपना अधिकांश द्रव्यमान सौर वायु के रूप में बाहर फेंक देते हैं जिसके बाद बस एक छोटा क्रोड बाकी रह जाता है.

अगर इस क्रोड का द्रव्यमान 'चंद्रशेखर सीमा' से कम हो तो वह श्वेत वामन तारा बन जाता है और अगर अधिक हो तो वह सिकुड़ कर ब्लैक होल बन जाता है.

किसी भी तारे के क्रमिक विकास से लेकर उसके अंत होने तक की समीक्षा करने के लिए 'चंद्रशेखर सीमा' बुनियादी है.

चंद्रशेखर को कला साहित्य और संगीत में बड़ी रुचि थी. विज्ञान, कला और सौंदर्यशास्त्र पर उनके निबंध 'ट्रूथ एंड ब्यूटी' नामक पुस्तक में छपे हैं.

हालांकि उनका जन्म एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था लेकिन वो पूरी तरह से नास्तिक थे.

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