विकास में शोध का अहम रोल: मनमोहन

भारत के प्रिन्सटन के नाम से मशहूर टाटा इंस्टीट्यूट फ़ॉर फंडामेंटल रिसर्च ने हैदराबाद में अपने दूसरे कैंपस का निर्माण शुरु कर दिया है.

टीएफ़ईआर एक ऐसी सरकारी संस्था है जो भारत के परमाणु कार्यक्रम के जन्मदाता होमी भाभा ने स्थापित की थी और जिसके पहले कैंपस की बॉम्बे में पंडित जवाहरलाल नेहरु ने नींव राखी थी. अब पचास वर्ष से भी ज़्यादा समय के बाद उसका दूसरा कैंपस हैदराबाद में बन रहा है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को इस विशाल कैंपस की नींव रखी. यह कैंपस 2500 करोड़ रुपये के खर्च पर तैयार किया जाएगा. इसका पहला केंद्र 2013 तक बन जाएगा जबकि पूरे कैंपस के निर्माण में पंद्रह वर्ष का समय लगेगा.

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति और विकास में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में शोध अहम् भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की के लिए ज़रूरी है कि विज्ञान से संबंधित सुविधाओं और बुनयादी ढांचे को और भी बेहतर बनाया जाए.

उनका कहना था, “भारत के सामने चुनौती ये हैं कि विज्ञान और तकनीक के मैदान में देश को दूसरे देशों पर जो बढ़त है उसे बनाए रखने के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जिसमें हर व्यक्ति अपनी पूरी योग्यता और कुशलता से काम कर सके और फायदा उठा सके.”

टीएफईआर के कई दूसरे केंद्र पुणे और बेंगलूर में भी स्थापित हैं. इस नए कैंपस के लिए राशी केंद्र सरकार और परमणु ऊर्जा विभाग के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी.

इस कैंपस के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने हैदराबाद विश्वविद्यालय की 209 एकड़ भूमि टीएफईआर को दी लेकिन इस पर विवाद हो गया क्योंकि विश्वविद्यालय के कुछ छात्र उसके विरोध में उठ खड़े हुए.

उन्होंने प्रधान मंत्री के कार्यक्रम में गड़बड़ की धमकी दी लेकिन पुलिस के कड़े प्रबंधों के चलते कोई गड़बड़ नहीं हुई.विश्वविद्यालय के कुलपति का कहना है की इस कैंपस की स्थापना से पूरी दुन्य को फायदा पहुंचेगा.