'मैं नशे में हूँ, तुम क्यों नहीं...'

शराब के असर पर शोध
Image caption शराब पीने वालों पर माहौल और इस नए जीन दोनों का बहुत असर होता है.

ऐसा क्यों है कि कुछ लोग दो पेग पी कर ही लड़खड़ाने लगते हैं जबकि कुछ अन्य पूरे होशोहवास में रहते हैं?

अमरीका में वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीन को खोजने का दावा किया है जिसके ज़रिए ये पता लगाया जा सकता है कि शराब का असर कुछ लोगों पर दूसरों के मुक़ाबले जल्दी क्यों होता है.

अमरीकी शोधकर्ताओं का मानना है कि सीवाईपीटूई वन नाम का ये जीन 10 से 20 प्रतिशत लोगों में पाया जाता है.

वैज्ञानिकों के अनुसार ये जीन शराब की लत से लड़ने में भी मदद कर सकता है.

नौर्थ कैरोलाइना विश्वविद्यालय का कहना है कि इस शोध का मक़सद लोगों में शराब की लत के ख़िलाफ़ लड़ाई करने में मदद करना है.

क्लीनिकल ऐंड एक्स्पेरीमेंटल रिसर्च नामक जर्नल के मुताबिक़ लोगों को शराब के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बनाने के लिए सीवाईपीटूई वन जीन को दवा की तरह दिया जा सकता है.

इसके मुख्य शोधकर्त्ता प्रोफ़ेसर किर्क विल्हेल्मसेन ने कहा कि ज़ाहिर है कि नशे का इलाज ढूंढने से हम अभी काफ़ी दूर हैं लेकिन हमने जो जीन खोजा है उसके ज़रिए इस बारे में बहुत सारी जानकारी मिलती है कि शराब किस तरह से दिमाग़ को प्रभावित करता है.

लोग जो शराब पीते हैं उसका ज्यादा तर हिस्सा सीधे गुर्दे में जाता है, लेकिन कुछ हिस्सा एक एन्ज़ाइम के ज़रिए दिमाग़ में भी जाता है.

जिन लोगों में सीवाईपीटूई जीन होता है उनमे शराब तेज़ी से दिमाग़ मे जाती है. इसी से ये समझ में आता है कि क्यों कुछ लोगों पर दूसरों के मुक़ाबले शराब का असर जल्दी होता है.

200 छात्रों पर शोध

इस नतीजे तक पहुंचने के लिए शोधकर्त्ताओं ने 200 जोड़े छात्रों पर इसका टेस्ट किया जो ख़ुद तो शराब के आदी नहीं थे लेकिन उनके मां-बाप में से एक शराब के आदी थे.

उन्होंने छात्रों को अनाज से बनने वाली शराब और सोडा का मिश्रण दिया जो औसतन तीन पैग शराब के बराबर थी.

Image caption अंगूर की शराब का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है

कुछ अंतराल पर छात्रों से पूछा गया कि उन्हें कैसा महसूस हो रहा है. उन्हें नशा आ रहा है, वे होश में है, नींद आ रही है या वो जगे हुए हैं. शोधकर्त्ताओं ने इस नतीजे की तुलना सीवाईपीटूई जीन देने के बाद छात्रों पर हुए असर से की.

इसके बाद पता चला कि सीवाईपीटूई वन बहुत हद तक ये निर्धारित करता है कि कोई व्यक्ति दूसरों की अपेक्षा शराब के असर को ज्यादा बेहतर तरीक़े से बर्दाशत कर सकता है या नहीं.

प्रोफ़ेसर विल्हेल्मसेन ने कहा कि इस बारे में और शोध करने की ज़रुरत है कि क्या इस नए खोज का इस्तेमाल शराब की लत को दूर करने के लिए किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि शराब की लत एक जटिल बिमारी है और लोग शराब क्यों पीते हैं इसके बहुत सारे कारण होते हैं. ये सिर्फ़ एक कारण हो सकता है.

अलकोहल कनसर्न नाम की चैरीटी संस्था के डॉन शंकर का मानना है कि शराब की लत एक सामाजिक समस्या है और इसकी आड़ में लोग शराब पीते हैं.

प्रोफ़ेसर कॉलिन ड्रमंड के अनुसार शराब की आदत के पीछे परिवार का बहुत प्रभाव होता है. शराबी माता पिता के बच्चों में शराब की आदत पड़ने की संभावना चार गुना ज़्यादा होती है.

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