एंटीबायोटिक्स ख़रीदने-बेचने के नए नियम

  • 30 अक्तूबर 2010
एंटीबायोटिक्स
Image caption मामूली बीमारी के लिए भी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल काफ़ी आम बात होती जा रही है

अब वे दिन लद गए दिखते हैं जब आप मेडिकल स्टोर्स में जाते थे और नाम बताकर कोई भी एंटीबायोटिक्स ख़रीद लेते थे.

अब सरकार ऐसे नियम बनाने जा रही है जिससे बिना पर्ची के मेडिकल स्टोर्स से आपको एंटीबायोटिक्स नहीं मिल सकेगी.

और तो और आपको एक ही दवा अगर दोबारा ख़रीदनी हो तो आपको डॉक्टर से फिर से एक नई पर्ची लेनी होगी.

भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने सिफारिश की है कि अब डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दवाओं का नुस्ख़ा लिखते समय दो पर्ची बनाएंगे जिसमें से एक पर्ची केमिस्ट को अपने पास दवा की बिक्री के दिन से लेकर एक साल तक रखनी होगा ताकि इनकी जांच-पड़ताल की जा सके.

फ़िलहाल यह नियम अस्तित्व में है कि बिना पर्ची के कोई दवा विक्रेता एंटीबायोटिक्स न बेचे लेकिन इसका पालन कोई नहीं करता.

उद्देश्य

नए क़दम का उद्देश्य व्यापक पैमाने पर हो रहे एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग को रोकना है.

इसके लिए ज़रुरी है कि अमरीका सहित पश्चिमी देशों की तरह दवा विक्रेता बिना डॉक्टर की पर्ची के एंटीबायोटिक्स बेचना बंद कर दे.

एंटीबायोटिक्स को लेकर यह क़दम हाल ही में सुपरबग की चर्चा के बाद शुरु हुआ है जिसके लिए भारत को दोषी ठहराया जा रहा है.

सुपरबग के पनपने की वजह एंटीबायोटिक्स को ही माना जाता है. सुपरबग एनडीएम-1 यानी 'नई दिल्ली मेटैलो-बीटा-लैक्टामेज़-1' एक ऐसा एंज़ाइम है जो अलग तरह के बैक्टीरिया के अंदर आसानी से रह सकता है.

इस एंज़ाइम को जो भी बैक्टीरिया अपने साथ लेकर चलेगा उस पर कार्बापेनेम नामक सर्वाधिक शक्तिशाली एंटीबायोटिक का भी कोई असर नहीं होता है.

विशेषज्ञों को डर है कि इस तरह ऐसे ख़तरनाक संक्रामक रोग पैदा हो सकते हैं जिनका इलाज लगभग नामुमकिन होगा.

अलग अनुसूची

डीसीजीआई ने अपने फ़ैसले को मजबूती से अमली जामा पहनाने के लिए ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत एंटीबायोटिक्स को एक अलग अनुसूची में रखने का फ़ैसला किया है.

दिल्ली के गुरू तेगबहादुर अस्पताल में न्यूरोसर्जरी विभाग के हेड डॉक्टर राकेश दुआ नए प्रावधानों को एक सकारात्मक क़दम मानते हैं. उन्होंने कहा कि आजकल मामूली दिक्कतों पर एंटीबायोटिक्स लेना एक आदत बनती जा रही है जो आगे चलकर कई परेशानियां पैदा करती हैं.

उनका कहना है, "मिसाल के तौर पर ऐसे कफ़ सिरप जिनमें कोडीन पाया जाता है, अगर उनको लगातार लिया जाए तो ये लत पैदा करने लगते हैं. मरीज की हालत ऐसी हो जाती है कि अगर दिन में दो बार इसे न ले तो उसे बेचैनी होने लगती है. आगे चलकर यह व्यक्ति के अंदर कई तरह के असामान्य व्यवहार को जन्म देती है."

नई अनुसूची में जिन 50-60 एंटीबायोटिक्स को रखने की बात कही गई है, उनमें 15 से 20 हैबिट फॉर्मिंग ड्रग (यानी लत पैदा करने वाली दवाइयां) भी शामिल हैं. इनमें वे कफ़ सिरप भी रखे गए हैं जिनमें कोडीन पाए जाते हैं.

नियमों के उल्लंघन पर कम से कम 20 हज़ार रूपए का ज़ुर्माना और एक साल के क़ैद की व्यवस्था है. नई सिफारिशों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास नोटिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा. इसके बाद औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड को छह महीने के भीतर इस पर अपनी मंजूरी देनी होगी.

नाकाफ़ी

Image caption डॉक्टरी सलाह के बिना भी एंटीबायोटिक की ख़रीद होती रही है

गुड़गांव स्थित मेदांता मेडिसिटी में कंसल्टेंट डॉक्टर आशीष श्रीवास्तव मानते हैं कि सिर्फ़ नियम बनाना पर्याप्त नहीं है उन पर अमल भी करना होगा.

उनका कहना है, "इस बात के लिए कड़े नियम बनाए जाने चाहिए कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के नुस्ख़े के एंटीबायोटिक खरीद न पाए. ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के वर्तमान नियमों के तहत डॉक्टरी नुस्ख़े के बिना एंटीबायोटिक्स नहीं खरीदा जा सकता है. लेकिन इस नियम का शायद ही कोई पालन करता है."

डॉक्टर आशीष एंटीबायोटिक्स के साइड इफेक्ट्स को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाए जाने की भी बात करते हैं.

नए नियमों पर केमिस्ट नाखुश दिखाई देते हैं. दिल्ली के कनाट प्लेस इलाक़े में केमिस्ट अनुराग गुप्ता कहते हैं, "हमारे पास हर रोज़ दवाइयों की तक़रीबन 30 पर्चियां एंटीबायोटिक्स दवाइयों की बिक्री से जुड़ी होती हैं. साल के 365 दिनों तक इस तरह का कागज़ संभालना हमारे कारोबार को प्रभावित करेगा."

वहीं उत्तर प्रदेश में रैमसन मेडिकोज़ के मालिक आरएन ग्रोवर का कहना है कि इस तरह के दस्तावेज़ों के रखरखाव के लिए अतिरिक्त कर्मचारी रखने होंगे जो हमारे लिए अतिरिक्त खर्च होगा.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉक्टर आर के श्रीवास्तव की अगुआई में एक कार्यदल का गठन किया है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक़ यह टास्क फोर्स भारत में एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल के विनियमन के लिए जल्दी ही कुछ और भी नए उपाय करेगा.

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