विकासशील देश मोटापे के निशाने पर

  • 12 नवंबर 2010
मोटा व्यक्ति
Image caption एक संगठन के मुताबिक मोटापे को माहमारी बनने से रोकने के तुरंत क़दम उठाने की ज़रुरत है.

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन यानि ओईसीडी ने विकासशील देशों को चेतावनी दी है कि मोटापे को महामारी बनने से रोकने के लिए तुरंत क़दम उठाने होंगे.

ब्रिटेन की चिकित्सा पत्रिका लांसेट में छपी ओईसीडी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़रीब देशों के लिए बढ़ते मोटापे के दुष्परिणामों को झेलना बेहद कठिन होगा.

संगठन का कहना है कि ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका में मोटापे की दर औसत को पार कर चुकी है. ब्रिटेन और अमरीका जैसे विकसित देशों में बढ़ते मोटापे की सम्स्या के साथ ही हृदय रोग कैंसर और मधुमेह जैसे ख़तरे भी जुड़ गए हैं.

हालांकि कुछ विकासशील देशों में समृद्ध लोगों में मोटापे की समस्या, पश्चिमी जीवन शैली के अनुसरण का नतीजा भी है, लेकिन अब संगठन ने मोटापे की दर तेज़ी से बढ़ने की चेतावनी दे दी है.

ओईसीडी के प्रतिनिधित्व वाले सभी देशों में लगभग 50 फ़ीसदी वयस्क या तो औसत से ज़्यादा वज़न के हैं या मोटापे के शिकार हैं.

भारत

भारत में हालांकि इस वर्ग में 20 फ़ीसदी से भी कम लोग आते हैं , और चीन में 30 फ़ीसदी से कम लोग मोटापे के शिकार बताए गए हैं लेकिन ओईसीडी के मुताबिक अब मोटापा महामारी बनने की राह पर तेज़ी से चल पडा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों को मोटापे की समस्या पर क़ाबू पाने के लिए तेज़ी से क़दम उठाने होंगे.

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि विकासशील देश मीडिया के माध्यम से सेहतमंद जीवन शैली को बढ़ावा दें, स्वास्थ्यवर्धक भोजन के लिए करों में रियायत दें, तैयार भोजन के पैकेटों पर भोजन के बारे में सही जानकारी लिखें, और हानिकारक भोजन के प्रचार पर रोक लगाए.

रिपोर्ट की एक लेखिका मिशैल सैचिनी का कहना है कि मोटापे की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए अलग अलग प्रयास करने के बजाए एक साथ चारों तरफ़ से वार करने से ज़्यादा फ़ायदा होगा.

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