क्लोन किया मीट है सुरक्षित

मांस
Image caption माना जाता है कि क्लोन किए गए मांस और दूध से व्यापार की दृष्टी से इसका उत्पादन और बढ़ेगा

नए तरह के खाद्य पदार्थ और उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ने कहा है कि कि क्लोन किए गए जानवरों का मांस और दूध उपयोग में लाया जा सकता है.

अंतरराष्ट्रीय संस्था 'द ऐडवाइज़री कमिटी ऑन नोवेल फ़ूड्स एण्ड प्रोसेस' का कहना है कि उसे नहीं लगता कि इनके इस्तेमाल से कोई ख़तरा हो सकता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लोन किए गए जानवरों और सामान्य जानवरों के मांस और दूध में कोई ख़ास फ़र्क नहीं पाया गया है.

द फ़ूड स्टैण्डर्ड एजेंसी ने कहा है कि ब्रिटेन में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं जहाँ क्लोन किए गए मीट बेचे गए थे.

क्लोनिंग की इजाज़त

एजेंसी के वैज्ञानिक ऐण्ड्रयू वैज ने कहा, "इस बात की पुष्टि की गई है कि क्लोन किए गए मवेशियों और उनके बछड़ों का मांस और दूध पारंपरिक तौर पर पैदा हुए जानवरों के मांस और दूध से भिन्न नहीं है और इसलिए ये नहीं माना जा सकता कि इससे उत्पन्न हुए खाद्य पदार्थ से स्वास्थ्य को कोई ख़तरा है."

अमरीका, दक्षिण अमरीका और एशिया में गायों, भेड़ों और सूअरों के क्लोन तैयार करने की इजाज़त है और इसे बड़े स्तर पर उत्पादन करने की दृष्टि से भी उचित माना जाता है.

लेकिन यूरोप के किसानों को इसके लिए इजाज़त लेनी पड़ती है और यह एक तरह का प्रतिबंध है.

इसकी अवमानना करने वालों को 5,000 पाउंड का जुर्माना देना पड़ता है.

यूरोप के कुछ किसान मानते हैं कि इसकी वजह से बाकियों की तुलना में वो घाटे में हैं क्योंकि वो नई तकनीक का इस्तेमाल अपने विकास के लिए नहीं कर पा रहे हैं.

लेकिन क्लोनिंग के विरोधी इसे जानवरो के प्रति नैतिक कारणों से नाइंसाफ़ी मानते हैं.

इस मामले को लेकर बनाए गए यूरोपीय आयोग का प्रस्ताव है कि क्लोन मीट और दूध पर प्रतिबंध लगा दिया जाए.