चींटियां भी रिटायर होती हैं

  • 7 जनवरी 2011
मेहनतकश चींटियाँ
Image caption चींटियाँ बूढ़ी होने पर भी काम करती रहतीं हैं.

जब पत्तियाँ खाने वाली चींटियों के दाँत घिस जाते है तो पता हैं वो क्या करती है?

वो रिटायर हो जाती है.

ओरेगॉन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना हैं कि बूढ़ी चींटियाँ पत्तियां काटने की बजाय उसे ढोने का काम करने लगती हैं.

पत्तियां काटने वाली चींटिंयों को कीड़ो की दुनिया का किसान माना जाता हैं.

ये मेहनतकश चींटियां बहुत काम करती हैं.

एक चींटी एक पत्ती को काट कर उसे ढोती है और उसका वज़न उसके शरीर के भार से पचास गुना ज़्यादा होता है.

चींटियाँ एक कतार बना कर मेहनत से तोड़ कर लाई गई पत्तियाँ ढो कर अपने घर लेकर जाती हैं.

यहाँ ये चींटियाँ इन पत्तियों को ज़मीन पर बिछाती है ताकि इसपर फंगस या फफूंद उग जाएं. ये फफूंद है जो उनके लिए भोजन पैदा करता हैं.

पर जब एक चींटी के दाँत घिस जाते हैं तो उसका टीम में काम धीमा पड़ जाता हैं.

बूढ़ापे में बदला रोल

शोधकर्ताओं का कहना हैं कि बूढ़ी चींटियों के लिए पत्ती काटना और उनपर पकड़ बनाना मुश्किल हो जाता है.

पर जब उनको इन शोधकर्ताओं ने क़रीब से देखा तो पाया कि जिनके जबड़े घिस जाते हैं तो वो अपना काम पूरी तरह से बदल देतीं हैं.

काटने का काम वो युवा चींटियों पर छोड़ देती हैं और खुद माल ढ़ोने का काम ले लेती है.

शोध से पता चलता हैं कि व्यवस्थित चींटियों के समाज में हर चींटी अपने मन मुताब़िक काम कर सकती हैं. इस तरह वो अपने बुढ़ापे में भी अपनी उपयोगिता बनाएं रख सकती हैं.

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