नहीं होगा बर्ड फ़्लू का असर..

पक्षियों में पाया जाने वाला बर्ड फ़्लू बहुत बड़ी चिंता का कारण रहा है. लेकिन अब ब्रितानी वैज्ञानिकों ने पहली बार जीन संवर्धित मुर्ग़ियाँ तैयार करने का दावा किया है जिनसे बर्ड फ़्लू नहीं फैलेगा.

ब्रिटेन में एडिनब्रा के रोसलिन इंस्टिट्यूट में कुछ विशेष मुर्ग़ियाँ हैं जिनमें कृत्रिम जीन है जो प्राकृतिक तौर पर मौजूद नहीं होता.

इस कृत्रिम जीन से फ़ायदा ये है कि अगर मुर्ग़ियों को बर्ड फ़्लू हो भी जाए तो भी वे संक्रमण नहीं फैलाती.

एडिनब्रा यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर हेलन सैंग कहती हैं कि बिमारियों से बचने के लिए टीकाकरण के बजाए जीन संवर्धन बेहतर तरीका है क्योंकि ये पद्घति वायरस उत्परिवर्तन ( म्यूटेशन) की सूरत में भी काम करती है.

तकनीक का फ़ायदा-नुकसान

प्रोफ़ेसर सैंग का कहना है, "फ़्लू से पोल्ट्री उद्योग को बड़ा ख़तरा है. अगर पक्षियों के प्रजनन में हम जीन संवर्धन का तरीका अपना लें तो हम कितने ही पक्षियों को बर्ड फ़्लू से बचा सकते हैं."

जर्नल साइंस पत्रिका में शोधकर्ताओं ने कहा है कि उनके काम से ये स्पष्ट होता है कि ऐसे जीन संवर्धित पशु-पक्षी बनाना संभव है जिन पर वायरस से फैलने वाली बीमारियों का असर नहीं होगा.

शोर्धकर्ताओं के मुताबिक नई तकनीक से खाद्य उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और लागत कम की जा सकती है.

हालांकि ब्रिटेन में पोल्ट्री काउंसिल ने इस पर सतर्कतापूर्ण प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अभी और शोध की ज़रूरत है.

उसका कहना था कि अगर उपभोक्ता इस तकनीक को स्वीकार करते हैं तभी उत्पादक इसका इस्तेमाल करेंगे.

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