ग्रीस में 2000 साल पूर्व जड़ी बूटियों का प्रयोग !

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Image caption प्राचीन ग्रीस में दवाएं बनाने में ख़ास पौधों का इस्तेमाल होता था

पहली बार इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं कि प्राचीन ग्रीस में दवाएं बनाने के लिए कुछ विशेष पौधों का इस्तेमाल किया जाता था.

इटली के तट के परे 2000 साल से भी अधिक पुराने एक जहाज़ के अवशेष में दवाओं की गोलियां मिली हैं.

ये खोज आधुनिक चिकित्सा शोध के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

इन दवाओं के विश्लेषण से पता चला कि इनमें प्याज़, अल्फ़ाअल्फ़ा, सैलरी और अन्य प्रकार के पौधों का इस्तेमाल हुआ.

प्राचीन ग्रीस के चिकित्सक और औषध विज्ञानी पेडेनियस डायसकोरिडस ने पहली शताब्दी में जड़ी बूटियों से बनी औषधियों पर एक विशाल कोश तैयार किया था.

प्याज़ के बारे में डायसकोरिडस ने लिखा था, "बड़ी प्याज़ गोल प्याज़ के मुक़ाबले अधिक तीखी होती है. वैसे सभी प्याज़ तीखी होती हैं और पेट में गैस पैदा करती हैं. उनसे भूख और प्यास बढ़ती है. पेट साफ़ होता है. ये बवासीर में लाभकारी है और इनकी गोलियां बनाकर जैतून के तेल में भिगाकर इस्तेमाल किया जाता है".

महत्वपूर्ण खोज

अमरीका के स्मिथसोनियन नेचुरल हिस्टरी म्यूज़ियम में विज्ञान इतिहासकार ऐलन टूमेड का कहना है कि औषध निर्माण में पिछले 2000 सालों से डायसकोरिडस के इस कोश का इस्तेमाल होता रहा है.

टूमेड वर्षों से प्राचीन चिकित्सा के मूल ग्रंथों का अध्ययन करते रहे हैं और उनका कहना है कि जहाज़ के अवशेषों में मिली गोलियों से ये साबित होता है कि ग्रीस और रोम में इस तरह की औषधियों का इस्तेमाल होता था.

ईसा से कोई 130 वर्ष पूर्व इटली के तट के परे डूबे इस प्राचीन जहाज़ के अवशेषों में चिकनी मिट्टी की जो गोलियां मिली हैं उनके डीएनए विश्लेषण से पता चलता है कि उनमें प्याज़ और दूसरे पौधों का इस्तेमाल किया गया था.

ऐलन टूमेड का कहना है, "पहली बार दवा की गोली का इस तरह से विश्लेषण किया गया है. कुछ पुरातत्वीय स्थलों में चिकित्सा में पौधों के प्रयोग के प्रमाण मिले हैं लेकिन यौगिक औषध के रूप में नहीं. इसलिए ये खोज बड़ी महत्वपूर्ण है".

"जहाज़ पर मिली इन गोलियों के विश्लेषण से पता चलता है कि ये यौगिक उन तत्वों से बनाए गए जिनका ज़िक्र चिकित्सा के मूल ग्रंथों में है जो इस बात की पुष्टि करता है कि दवाएं बनाने के लिए चिकित्सक इन ग्रंथों का इस्तेमाल किया करते थे".

ऐलन टूमेड का विचार है कि इन पौधों का इस्तेमाल जहाज़ कर्मियों की बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता था और वो कारगर थीं.

"हमने पाया कि ब्रॉकोली का इस्तेमाल होता था जो निश्चय ही मलाशय के कैंसर के इलाज के लिए होता होगा. और ये महज़ एक इत्तेफ़ाक ही है कि आधुनिक चिकित्सा में इस खोज पर काफ़ी पैसा और समय ख़र्च किया जा रहा है कि क्या ब्रॉकोली कैंसर के इलाज में लाभकारी साबित हो सकती है".

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