बाढ़ और सूखे से सुरक्षित धान

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वैज्ञानिकों का कहना है कि बाढ़ से धान की रक्षा करने वाला एक जीन पौधे को सूखे के दुष्प्रभावों से भी बचाता है.

इस सब-1ए नामक जीन के कारण सूखे के लंबे दौर के बाद भी धान के पौधे में नई शाख निकल पाती है.(ऊपर के चित्रों में दायीं तरफ़ का पौधा.)

इस खोज को वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चावल दुनिया के तीन अरब लोगों का मुख्य आहार है.

लेकिन दुनिया भर में धान की खेती का 25 प्रतिशत विषम मौसमी परिस्थितियों वाले इलाक़ों में केंद्रित है.

धान के सब-1ए जीन के बारे में रिपोर्ट विज्ञान पत्रिका 'द प्लान्ट सेल' में प्रकाशित हुई है.

प्रभावी जीन

रिपोर्ट तैयार की है अमरीका के कैलीफ़ोर्निया रिवरसाइड विश्वविद्यालय के वनस्पति और पौध विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने.

अनुसंधान दल की प्रमुख जुलिया बेली सेरेस ने बताया, "बाढ़ को सहने वाले धान के पौधों में सूखे के ख़िलाफ़ सुरक्षा कम नहीं हुई, बल्कि इसके उलट वे सूखे का ज़्यादा बढ़िया से सामना कर पाए."

उल्लेखनीय है कि पानी में पूरी तरह डूबे धान के पौधे को जीवित रखने वाले जीन की पहचान पहली बार 2006 में की गई थी.

सब-1ए जीन के प्रभावों का अध्ययन करने वाली टीम ने पाया कि सूखे के दौर के ख़िलाफ़ इसकी प्रतिक्रिया लगभग वैसी ही है, जैसी बाढ़ के ख़िलाफ़.

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