चीन 2013 तक अमरीका को पछाड़ देगा

चीन विज्ञान
Image caption विश्लेषकों का कहना है कि चीन की बढ़ती उन्नति से अमरीका को झटका लग सकता है

ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी यानि राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ने एक अध्ययन में पाया है कि वर्ष 2013 तक चीन विज्ञान के क्षेत्र में अमरीका को पछाड़ सकता है.

इससे पहले लगाए गए अनुमान में कहा गया था कि चीन विज्ञान के क्षेत्र में वर्ष 2020 के बाद ही अमरीका की बराबरी कर सकेगा.

लेकिन गनपाउडर, काग़ज़, प्रिंटिंग और कम्पास का अविष्कार करने वाला देश, चीन एक वैश्विक विज्ञान शक्ति बनने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.

प्रकाशित किए गए इस अध्ययन में लिखा है कि चीन का विज्ञान और अनुसंधान क्षेत्र असाधारण रुप से तरक्की कर रहा है.

अध्ययन में अमरीका, यूरोप और जापान के समक्ष आगामी चुनौतियों के बारे में भी उल्लेख किया गया है.

कोई आश्चर्य नहीं

साल 1996 में अमरीका ने अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध के 2.92 लाख शोध या अध्ययन काग़ज प्रकाशित किए थे, जो कि चीन से 10 गुना ज़्यादा थे.

लेकिन 2008 तक जहां अमरीका में इन प्रकाशनों की तादाद में थोड़ी ही बढ़त देखने को मिली, वहीं चीन में इन प्रकाशनों की संख्या सात गुना ज़्यादा बढ़ी.

रिसर्च में ब्रिटेन को पछाड़ देने के बाद अब चीन अमरीका को अगले दो सालों में ही पछाड़ सकता है.

इस रिपोर्ट के अध्यक्ष प्रोफेसर क्रिस लेवेलिन स्मिथ ने कहा कि इस शोध के नतीजे से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि चीन शोध और विकास के क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है.

विज्ञान के क्षेत्र में साल 1999 से लेकर चीन के निवेश में हर साल 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. अब चीन दस लाख पांच हज़ार इंजीनियरिंग के छात्रों पर 100 अरब डॉलर से ज़्यादा खर्च कर रहा है.

प्रोफेसर क्रिस लेवेलिन स्मिथ ने कहा, “मेरे हिसाब से ये एक सकारात्मक लाभ है. हालांकि कई लोग इसे एक ख़तरे के रुप में देख सकते हैं लेकिन ये एक चेतावनी भी है.”

इस रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि अमरीका में शोध के क्षेत्र में ज़्यादा कमी नहीं आएगी और जापान और फ्रांस जैसे देश चीन की बराबरी के लिए आगे बढ़ रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ “विज्ञान लीग टेबल सिर्फ किसी देश की शान को नहीं दर्शाते, बल्कि ये किसी देश की वैश्विक क्षमता का संकेत है.”

चीन की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ विज्ञान एक दूसरा ऐसा मापदंड है जो चीन की बढ़ती वैश्विक ताकत को दर्शाता है.

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