रहस्यमय शांत तारा मंडल

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Image caption ब्रह्मांड में युगल तारे बहुत हैं लेकिन तीन तारों का मंडल भी आम हो सकता है

तीन तारों के बीच हो रहे नृत्य को देखकर खगोलज्ञ हैरान हैं क्योंकि इसमें कोई ध्वनि पैदा नहीं हो रही है.

इस तारा मंडल को केपलर दूरबीन से देखा गया है.

अधिकतर तारे अपने भीतर एक गूंज पैदा करते हैं. इन तारों से जो रोशनी निकलती है उसमें होने वाले परिवर्तन को केपलर दूरबीन देख लेती है.

लेकिन 'साइंस' नामक पत्रिका में खगोलज्ञों ने एक विशाल लाल तारे का उल्लेख किया है जो बहुत शांत है.

इस तारे को एचडी 181068 ए के नाम से जाना जाता है. यही नहीं दो छोटे युगल लाल तारे इस तारे का चक्कर भी लगाते हैं.

तारों के भीतर पैदा होने वाली इस ध्वनि के अध्ययन को ऐस्ट्रोसीसमोलॉजी कहा जाता है.

केपलर दूरबीन 500 से अधिक तारों के भीतर होने वाली गहरी गड़गड़ाहत को माप चुकी है.

तारों से निकलती ध्वनि

जब तारों के भीतर का पदार्थ बाहर की ओर आता है तो बहुत कम आवृत्ति की ध्वनि तरंगे पैदा होती हैं.

जब ये गैसें सिकुड़ती हैं और उनका घनत्व कम होता है तो उनके तापमान में परिवर्तन होता है. इसकी वजह से तारे से निकलने वाली रोशनी में भी बदलाव आते हैं.

रोशनी की वक्रता में होने वाले इन छोटे छोटे परिवर्तनों को केपलर जैसी दूरबीन मापती है.

लेकिन एचडी 181068 ए की कहानी कुछ अजीब ही है. पहली बात तो ये कि यह युगल तारा नहीं बल्कि तीन तारों का मंडल है.

दो छोटे युगल तारे एक दूसरे का चक्कर लगाते हुए एक दूसरे के सामने से तो गुज़रते ही हैं इस विशाल लाल तारे के सामने से भी गुज़रते हैं.

इस तारा मंडल में क्या चल रहा है उसे इनसे निकलने वाली रोशनी से मापा जा सकता है.

लेकिन बड़े लाल तारे की चुप्पी ने वैज्ञानिकों को हैरान कर रखा है.

वैज्ञानिक हैरान

इस नए अध्ययन की प्रमुख लेखिका हंगरी विश्वविद्यालय की ऐलिज़ डेरेकास ने बीबीसी को बताया कि इस विशाल लाल तारे में धड़कन होनी चाहिए.

"हम जानते हैं कि सभी विशाल लाल तारों में किसी न किसी तरह का दोलन होता है. तारे की सतह पर रोशनी की वक्रता की कुछ लहरें दिखाई देनी चाहिए. हम इस दोलन की अवधि का अनुमान लगा सकते हैं लेकिन इस विशाल लाल तारे पर दोलन की अवधि दिखाई ही नहीं दे रही".

खगोलज्ञों का अनुमान है कि हो सकता है इन तीनों तारों के बीच जो गुरुत्वाकर्षण बल है वो इस दोलन को कम कर रहा है.

लेकिन अमरीका के टैक्सस विश्वविद्यालय के खगोलज्ञ माइक मॉंटगोमरी का कहना है कि एक दूसरा ही बल काम कर रहा हो सकता है.

"युगल तारा मंडल या तीन तारों के मंडल में जब किसी तारे का समूचा हाइड्रोजन जल कर ख़त्म हो जाता है तो वो लाल तारा बन जाता है. अगर वो दूसरे तारे के काफ़ी नज़दीक हो तो वो अपना पदार्थ दूसरे तारे में फेंकने लगता है. हो सकता है यही उस बड़े लाल तारे के दोलन को प्रभावित कर रहा हो".

जो भी हो केपलर दूरबीन की इस खोज से इतना ज़रूर लगता है कि ब्रह्मांड में इस तरह के और तारा मंडल होंगे.

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