बढ़ सकता है हड्डियाँ टूटने का ख़तरा...

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शोधकर्ताओं का कहना है कि जो बुज़ुर्ग थायरॉयड के लिए अधिक मात्रा में दवाई लेते हैं उनमें हड्डियाँ कमज़ोर होने और टूटने का ख़तरा बढ़ जाता है.

जिन लोगों को थायरॉयड की समस्या होती है उन्हें थायरॉक्सिन हॉरमोन दवा के ज़रिए दिया जाता है. ये एक सिंथेटिक हॉरमोन है.

ब्रिटिश मेडिकल जरनल में शोधकर्ताओं ने लिखा है कि इस हॉरमोन के ज़्यादा मात्रा में दिए जाने से फ़्रेक्चर होने का ख़तरा बढ़ता है. शोध में कहा गया है कि बढ़ती उम्र के साथ इसका सेवन कम कर देना चाहिए.

अनुमान के मुताबिक 20 फ़ीसदी बुज़ुर्ग लोग हाइपोथायरोड के लिए लंबे समय तक दवा लेते हैं.

माना जाता है कि मरीज़ों को समय-समय पर नियमित जाँच करवानी चाहिए ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि वो सही मात्रा में दवा ले रहे हैं या नहीं. लेकिन बहुत से लोग युवा अवस्था से लेकर बूढ़े होने तक उसी मात्रा में दवा लेते रहते हैं.

यानी थायरॉक्सिन हॉरमोन की मात्रा शरीर में अधिक हो जाती है. इससे हड्डियाँ कमज़ोर ही सकती हैं, ख़ासकर उम्रदराज़ महिलाओं में.

दवा की मात्रा पर अंकुश

अपने शोध में टोरंटो के वुमेन्स कॉलेज रिसर्च इंस्टिट्यूट के दल ने 70 साल से ज़्यादा करीब दो लाख लोगों का अध्ययन किया. ये वो लोग थे जिन्हें 2002 और 2007 के बीच लेवोथायरॉक्सिन दिया गया जो थायरॉक्सिन का सिंथेटिक रूप है.

लोगों को दो गुटों में बाँटा गया- जो लोग वर्तमान में दवा ले रहे हैं और और जिन लोगों ने अध्ययन से पहले दवा लेना बंद कर दिया था. नतीजे में पाया गया कि 10 फ़ीसदी से ज़्यादा लोगों में अध्ययन के दौरान फ़्रेक्चर हुआ.

शोध में ये भी पाया गया कि जो लोग वर्तमान में थायरॉक्सिन ले रहे थे उनमें हड्डियाँ टूटने का ख़तरा ज़्यादा देखा गया.

शोधकर्ताओं ने लिखा है कि इससे ये संकेत मिलते हैं कि दवा कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए इस पर नज़र रखने की ज़रूरत है.

पत्रिका में एक शोधकर्ता प्रोफ़ेसर ग्राहम लीसे ये भी लिखा गया है कि बुज़ुर्गों को थायरॉक्सिन कम मात्रा में दी जानी चाहिए.

वे लिखते हैं कि हाइपो थायरॉयड के लिए दवा लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है और ब्रिटेन में फ़्रेक्चर पर होने वाला खर्च भी बढ़ रहा है और इस पर ध्यान देनी की ज़रूरत है.

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