क्यों एंडोसल्फ़ान पर प्रतिबंध न हो: सुप्रीम कोर्ट

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खेती-बाड़ी में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक एंडोसल्फ़ान की बिक्री और उत्पादन पर भारत में प्रतिबंध लगाया जाए या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम फ़ैसला शुक्रवार को आने की उम्मीद है. इस मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और गंभीर रुख़ अपनाया है.

कोर्ट ने पूछा है कि चूँकि ये लोगों की ज़िंदगियों का सवाल है तो क्या इंडोसल्फ़ान की बिक्री पर तब तक प्रतिबंध लगा दिया जाए जब तक इस बारे में पूरी परीक्षण रिपोर्ट न आ जाए.

दरअसल केरल में मंगलवार को ही केरल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने हिंदुस्तान इिनसेक्टिसाइड्स लिमिटिड की ईकाई में एंडोसल्फ़ान के उत्पादन पर रोक लगा दी है.

सीपीआई-एम की युवा इकाई डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया की ओर से मामले में याचिका दायर की गई है. उनके वकील दीपक प्रकाश ने बताया,“सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या केरल में पाबंदी लगाने से पहले परीक्षण करवाए गए थे या नहीं. इसके जवाब में बताया गया कि गहन अध्ययन के बाद ही ऐसा किया गया है.”

इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में पूछा है कि क्या पूरे देश में ऐसा प्रतिबंध लगाया जा सकता है.सरकारी वकील ने खंडपीठ को बताया है कि एंडोसल्फ़ान से मनुष्यों को होने वाले नुकसान पर वैज्ञानिक परीक्षणों के नतीजों का अभी सरकार इंतज़ार कर रही है.

वकील दीपक प्रकाश के मुताबिक कोर्ट में इस संभावना पर भी चर्चा हुई कि अगर दो-तीन महीने बाद एंडोसल्फ़ान के मुद्दे पर आने वाली जाँच रिपोर्ट में पाया गया कि ये कीटनाशक नुकसानदेह है तो प्रतिबंध हटाया जा सकता है.

सौ से ज़्यादा देशों ने प्रतिबंध को मंज़ूरी दी

भारत विश्व में एंडोसल्फ़ान के सबसे बड़े उत्पादक देशों में से है. कपास, चाय की खेती में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल होता है.

लेकिन इससे इंसानों की सेहत और पर्यावरण को होने वाले कथित नुकसान को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है. कई संगठनों ने आवाज़ उठाई है कि ये कीटनाशक विशैला है और अगर शरीर में चला जाए तो घातक हो सकता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो इस साल अप्रैल में हुए स्टॉकहोम सम्मेलन में 100 से ज़्यादा देशों ने तय किया था कि एंडोसल्फ़ान के उत्पादन और इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी जाए.

यानी एंडोसल्फ़ान अब कीटनाशकों की संयुक्त राष्ट्र की उस सूची में शामिल हो गया है जिन्हें दुनिया से हटाना है.

ये प्रतिबंध 2012 के मध्य से लागू होना है. कुछ मामलों में पाँच साल की छूट दी गई है या फिर तब तक के लिए जब तक एंडोसल्फान की जगह वैकल्पिक उत्पाद तैयार नहीं हो जाता.भारत ने शुरु में उस संधि का विरोध किया था लेकिन बाद में शर्तों के तहत वो मान गया.

किसानों, पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के बीच भारत में बहस तेज़ हुई है कि जब दुनिया के इतने देशों में एंडोसल्फ़ान को ख़तरनाक मानकर प्रतिबंधित किया जा रहा है तो फिर भारत में लोगों की सेहत के साथ क्यों खिलवाड़ किया जा रहा है.

लेकिन कीटनाशक बनाने करने वाली कंपनियाँ एंडोसल्फ़ान पर प्रतिबंध का विरोध करती आई हैं. अगर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम फ़ैसला आता है तो इस मामले में लोगों को कुछ स्पष्टीकरण ज़रूर मिलेगा.

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