खनन की वजह से डूबे दो द्वीप

  • 15 मई 2011
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Image caption 21 द्वीपों के इस समूह में से अधिकतम पर कोई नहीं रहता.

भारत और श्रीलंका के बीच मन्नार की खाड़ी में स्थित दो छोटे द्वीप समुद्र में डूब गए हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा मूंगे की चट्टान खोदने की वजह से हुआ है.

दोनों द्वीप एक ऐसे द्वीप-समूह का हिस्सा थे, जिसे दक्षिण एशिया का पहला समुद्री जीव संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है.

तमिलनाडु में इस क्षेत्र के वन और वन्य जीवन के मुख्य संरक्षक एस बालाजी बताते हैं कि मछुआरों ने पूमारीचान और विलान्गुचाल्ली में पिछले कई दशकों से ग़ैरकानूनी ढंग से मूंगे की चट्टानें खोदीं थीं.

बीबीसी की तमिल सेवा से बातचीत में उन्होंने कहा, “पहले कोई नियम या कायदा ना होने की वजह से इतनी ग़ैर-कानूनी खुदाई हुई, वर्ष 2002 में पर्यावरण संरक्षण कानून पारित होने के बाद ही ये रुका.”

क्या बढ़ता तापमान है वजह?

एस बालाजी के मुताबिक़ जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ा समुद्र का जल स्तर ही इन द्वीपों के डूबने का कारण है.

लेकिन ब्रिटेन की प्राउडमैन ओशियानोग्रैफिक लेबॉरिटरी के साइमन हौलगेट इससे सहमत नहीं, उनका तर्क है कि उस इलाके में जल स्तर बढ़ने की दर दुनिया की औसत से कम है.

हौलगेट ने बीबीसी को बताया, “मेरे ख्याल से अंतरराष्ट्रीय जल स्तर के बढ़ने का इन द्वीपों के ग़ायब होने पर कोई असर नहीं हुआ, इसकी वजहें कुछ और हैं, शायद मूंगे की चट्टानें खोदने से ये हुआ.”

इनकी खुदाई से निकले मूंगे निर्माणकार्य में इस्तेमाल किए जाते हैं.

इस संरक्षित क्षेत्र में करीब 3,600 समुद्री जीव और वनस्पतियाँ पाई जाती हैं.

एस बालाजी मन्नार की खाड़ी के संरक्षित क्षेत्र ट्रस्ट के निदेशक भी हैं. वो कहते हैं कि, "ये छोटे द्वीप समुद्र से सिर्फ 10-15 फीट ऊंचे थे, लेकिन इनके डूबने से अन्य छोटे द्वीपों पर मंडराता ख़तरा साफ हो जाता है."

इस इलाक़े के आस-पास रहने वाले लोगों का कहना है कि मन्नार की खाड़ी की मूंगे की चट्टानों ने ही उन्हें दिसंबर 2004 की विनाशकारी सुनामी लहरों से बचाया था.

भारत के राष्ट्रीय समुद्र-विज्ञान संस्थान के मुताबिक खाड़ी के सभी द्वीपों में से ज़्यादातर की अवस्था ठीक नहीं है.