एंडेवर का अंतिम अंतरिक्ष मिशन

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Image caption अमरीकी अंतरिक्ष यान एंडेवर अपनी अंतिम उड़ान पर रवाना हुआ

अमरीकी अंतरिक्ष यान 'एंडेवर' सोमवार की सुबह फ़्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सैंटर से अपने अंतिम मिशन पर रवाना हो गया.

ये यान 'अल्फ़ा मैग्नेटिक स्पैक्टोमीटर' नामके दो अरब डॉलर वाले अणु भौतिकी यंत्र को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में पहुंचाएगा.

जब 'एंडेवर' अपना मिशन पूरा करके लौटेगा तो अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के शटल बेड़े में केवल 'एटलांटिस' बचेगा.

'एटलांटिस' इस साल जुलाई में अपना अंतिम मिशन पूरा करेगा.

नासा के प्रशासक चार्ल्स बोल्डन ने एक बयान में कहा, "एंडेवर की अंतिम उड़ान मानवीय अंतरिक्ष उड़ान में अमरीकी कौशल और नेतृत्व का प्रमाण है".

तीस साल का शटल कार्यक्रम पूरा करने के बाद अमरीका अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पहुंचाने के लिए रूसी 'सोयूज़' यानों का प्रयोग करेगा.

इस दशक के मध्य तक कई अमरीकी व्यावसायिक यान भी सेवा में आ जाएंगे.

नासा इन यानों में अपने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सीटें ख़रीदेगा.

जिसका मतलब ये हुआ कि नासा पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाने के लिए जिन यानों का प्रयोग करेगा वो उसके नहीं होंगे.

इस योजना से ये लाभ होगा कि नासा अपने संसाधनों का प्रयोग अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली तैयार करने के लिए कर सकेगा जिससे आगे चलकर अंतरिक्षयात्री चंद्रमा, क्षुद्रग्रहों और मंगल ग्रह तक की यात्रा कर सकेंगे.

एंडेवर का इतिहास

एंडेवर का निर्माण 1986 में 'चैलेंजर' यान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद किया गया था.

इसने अपनी पहली उड़ान 7 मई 1992 को की थी.

'एंडेवर' ने अंतरिक्ष में 280 दिन बिताकर पृथ्वी के कुल 4,429 चक्कर लगाए हैं.

इस अंतिम मिशन को पूरा कर लेने के बाद एंडेवर 16 करोड़ 60 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर लेगा.

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के निर्माण के पहले मिशन पर यही यान गया था और हबल दूरबीन की मरम्मत का भी पहला मिशन इसी ने पूरा किया था.

इस अंतिम मिशन में 'एंडेवर' जो 'अल्फ़ा मैग्नेटिक स्पेक्टोमीटर' ले गया है उसे तैयार करने में 17 साल लगे हैं.

इस यंत्र को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के ऊपर लगाया जाएगा जहां से वो ब्रह्मांडीय किरणों का व्यापक सर्वेक्षण करेगा.

ये अत्यधिक ऊर्जा वाले अणु हैं जो ब्रह्मांड के सभी कोनों से पृथ्वी की दिशा में तेज़ी से बढ़ते हैं.

वैज्ञानिकों को आशा है कि इन अणुओं के गुणों का पता लगाने से इस तरह के सवालों के जवाब ढूंढने में मदद मिलेगी कि ये ब्रह्मांड कैसे अस्तित्व में आया और इसका निर्माण कैसे हुआ.

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