टीकों के लिए अनुदान घोषित

टीका
Image caption विकासशील देशों में डायरिया और न्यूमोनिया लाखों बच्चों की जान ले लेते हैं

विकासशील देशों के बच्चों को न्यूमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से बचाने के लिए कई देशों और संस्थाओं ने लगभग साढ़े चार अरब डॉलर की राशि जुटाने का वादा किया है.

जितनी उम्मीद की जा रही थी कि उससे यह रक़म लगभग 50 करोड़ डॉलर अधिक है.

वैश्विक स्तर पर टीकाकरण के लिए ज़िम्मेदार संगठन दी ग्लोबल एलांयस ऑन वैक्सीन एंड इम्य़ूनाइज़ेशन यानी 'गावी' की बैठक में लंदन में यह घोषणा की गई.

गावी कई देशों की सरकारों, व्यापार समूहों, वर्ल्ड बैंक, य़ूनिसेफ़ और बिल गेट्स की संस्था को मिलाकर बनाया गया संगठन है.

इस अभियान के लिए आर्थिक सहायता देने वालों माइक्रोसॉफ़्ट कॉर्पोरेशन के बिल गेट्स अग्रणी हैं, वे इस बैठक में ख़ुद भी मौजूद थे.

उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी की वजह से टीकाकरण से वंचित रह गए लाखों बच्चों की मौतों को टाला जा सकेगा. एक अनुमान के मुताबिक़ नई धनराशि की वजह से चालीस लाख बच्चों को न्यूमोनिया और डायरिया से बचाया जा सकेगा.

बिल गेट्स ने कहा कि टीकाकरण का काम पाँच साल में पूरा हो जाएगा और इसके लिए उनकी संस्था अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराने जा रही है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि अनेक बीमारियों के लिए नए टीके तैयार करने के काम भी तेज़ी आएगी.

इस बैठक में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन भी मौजूद थे जिन्होंने टीकाकरण के लिए धन जुटाने की मुहिम को पुरज़ोर समर्थन दिया है.

ब्रिटेन ने इस काम के लिए 81 करोड़ पाउंड की सहायता देने की घोषणा की है.

ये आकलन है कि मलेरिया और एचआईवी एड्स के मुक़ाबले न्यूमोनिया और डायरिया से तीन गुना अधिक बच्चों की मौत होती है.

गावी अब तक 19 देशों में बच्चों के ये टीके उपलब्ध करा चुका है लेकिन संस्था का कहना था कि उसे अभी तक दो करोड़ 30 लाख डॉलर नहीं मिले हैं जिससे कि वह 26 अन्य देशों में बच्चों को टीके लगवा सके.

नई धनराशि के आने के बाद फ़िलहाल यह समस्या दूर हो गई है, हालाँकि अभी ऐसी अनेक बीमारियाँ जिनके टीके विकासशील देशों में निर्धन लोगों को उपलब्ध नहीं हैं.

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