कृत्रिम गर्भाधान के ख़तरे

Image caption दवाओं की मदद से कृत्रिम गर्भाधान से असामान्य बच्चे पैदा होने के ख़तरे बढ़ सकते हैं

एक रिपोर्ट के मुताबिक ज़्यादा उम्र की महिलाओं में दवाओं के ज़रिए आईवीएफ़ (इनविट्रो फ़र्टिलाइज़ेशन) यानि कृत्रिम तरीके से गर्भाधान कराए जाने पर पैदा होनेवाले बच्चों में डाउन्स सिंड्रोम के ख़तरे ज़्यादा होते हैं.

डाउन्स सिंड्रोम वाले बच्चों का अर्थ है वे बच्चे जो शारीरिक और मानसिक विकास की दृष्टि से असामान्य लक्षणों के साथ पैदा होते हैं.

दवाओं से कृत्रिम गर्भाधान

डॉक्टर ये बात पहले ही जानते हैं कि ज़्यादा उम्र की माताओं में ख़ासतौर से 35 साल से अधिक उम्र की माताओं के बच्चे में आनुवंशिकता से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं.

अब ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कम से कम 34 दंपतियों पर शोध कर ये राय ज़ाहिर की है कि ज़्यादा उम्र की महिलाओं में आईवीएफ़ के ज़रिए गर्भाधान के लिए अंडाशय को सक्षम बनाने के लिए जब दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है तब उनके अंडाणुओं की जनन क्षमता प्रभावित होती है.

स्वीडन में इस विषय पर हुई एक बैठक में कहा गया है कि शंकाओं को लेकर किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले और शोध की ज़रूरत है.

शोधकर्ताओं को अभी इस समस्या के ख़तरों की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि डाउन्स सिंड्रोम के अलावा भी आनुवंशिकता से जुड़े कई अन्य ख़तरे हो सकते हैं.

ब्रिटेन में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए उपचार करवा रहे 34 दंपतियों पर किए गए शोध के नतीजों को यूरोपीयन सोसायटी ऑफ़ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एम्ब्रायोलॉजी के वार्षिक सम्मेलन में पेश किया गया.

समूह में शामिल सभी महिलाएं 31 साल से ज़्यादा उम्र की थीं और उनके अंडाशय को ज़्यादा अंडाणु तैयार करने लायक बनाने कि लिए दवाएं दी जा रही थीं ताकि उनका कृत्रिम गर्भाधान कराया जा सके.

और शोध की ज़रूरत

जब शोधकर्ताओं ने ऐसे निषेचित अंडाणुओं का अध्ययन किया तो पाया कि उनमें से कुछ में आनुवंशिक कमियां थीं.

इन कमियों की वजह से या तो गर्भावस्था विफल हो सकती थी या फिर बच्चा आनुवंशिक बीमारियों के साथ पैदा हो सकता था.

लंदन ब्रिज फ़र्टिलिटी, गायनोकॉलोजी एंड जेनेटिक्स सेंटर के निदेशक और अग्रणी शोधकर्ता प्रोफ़ेसर ऐलेन हैंडीसाइड ने कहा कि इस बारे में और ज़्यादा शोध की ज़रूरत है.

''ऐसा लगता है कि अंडाशयों को उत्तेजित किए जाने की वजह से ये समस्या पैदा हो रही है. हम पहले ही ये जानते हैं कि प्रजनन संबंधी दवाएं प्रयोगशाला में किए जा रहे अध्ययन पर भी समान प्रभाव छोड़ सकती हैं. लेकिन इन नतीजों को पुख़्ता करने से पहले हमें और ज़्यादा शोध करने की ज़रूरत है.''

ब्रिटेन के प्रजनन विशेषज्ञ स्टूअर्ट लेवरी कहते हैं, ''बच्चे पैदा करने में देर करने की वजह से अब आईवीएफ़ के ज़रिए गर्भाधान करनेवाली ज़्यादा उम्र की महिलाओं की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. पहले हम ये सोचते थे कि पैदा होनेवाले बच्चों में देखी जा रही गुणसूत्र संबंधी असामान्यताएं अंडाणु की उम्र की वजह से थीं. लेकिन अध्ययन से ऐसे संकेत मिले हैं कि ऐसी कुछ असामान्यताएं उपचार से जुड़ी हो सकती हैं.''

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