फ़ेसबुक पर अरबी महानायक

  • 14 जुलाई 2011
Image caption 'हैप्पी ओएसिस' के फ़ेसबुक पर काफ़ी प्रशंसक हैं

फ़ेसबुक पर एक नया सोशल मीडिया गेम लॉन्च किया गया है जिसके महानायक अरब हैं.

इस प्रोजेक्ट को शुरू करनेवाले सुलेमान बख़ित को उम्मीद है कि अरबी महानायक 'हैप्पी ओएसिस' वैसे बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है जो चरमपंथी विचारों के बहकावे में आ सकते थे.

ये गेम इसी हफ़्ते लॉन्च हुआ है और इसके 50,000 प्रशंसक भी बन गए हैं.

टेड के नवनियुक्त फ़ेलो सुलेमान बख़ित ने अपने इस प्रोजेक्ट की जानकारी एडिनबर्ग में हुए टेडग्लोबल के कॉन्फ़्रेंस में दी.

चरमपंथ के ख़िलाफ़ मुहिम

जॉर्डन के नागरिक बख़ित अमरीका पर हुए नौ-ग्यारह के हमले के दौरान वहां के मिनीसोटा विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे.

थोड़े ही दिनों बाद उन पर अरब मूल का होने की वजह से चार लोगों ने हमला कर दिया था.

सुलेमान बख़ित ने अपने प्रति हुए व्यवहार से क्षुब्ध होने के बावजूद चित्रकथाओं के कई पात्रों का सृजन किया.

Image caption सुलेमान बख़ित ने कई चित्रकथा पात्रों को जन्म दिया है

उन्होंने शैक्षिक अभियान में शामिल होने का भी फ़ैसला किया.

उन्होंने बीबीसी को बताया,"मैंने महसूस किया कि युवाओं से शुरू कर ही चरमपंथ का मुक़ाबला किया जा सकता है. संदेश बहुत साफ़ था- 'हम सब चरमपंथी नहीं हैं'.

सुलेमान बख़ित ने स्थानीय स्कूलों में अलादीन शैली की कहानियां सुनानी शुरू कीं. ये कहानियां 'चमत्कारी कालीन' जैसी कहानियों से थोड़ी अलग थीं.

अरबी महानायक

उन्होंने कहा,"एक दिन एक बच्चे ने मुझसे अरबी सुपरहीरो के बारे में सवाल किया और मैंने महसूस किया कि वाक़ई चित्रकथाओं में कोई अरब नायक नहीं था.

उसके बाद उन्होंने अपने चित्रकथाओं की परियोजना शुरू की जिसका मक़सद प्रेरक अरबी महानायकों का सृजन करना था. परियोजना के तहत एक महिला जेम्स बॉण्ड और एक जॉर्डन स्पेशल एजेंट की भी कल्पना की गई थी जो चरमपंथियों से मुक़ाबला करते हैं.

जॉर्डन में सुलेमान बख़ित ने अपनी चित्रकथाओं की तीन लाख प्रतियां बेचने के बाद महसूस किया इंटरनेट की दुनिया में भी उनकी कथाओं का बाज़ार बन सकता है.

उन्होंने कहा," प्रिंट मीडिया मर रही है लेकिन तीन करोड़ अरब फ़ेसबुक पर हैं. इसीलिए मैंने उन्हीं संदेशों वाले सोशल गेम्स बनाने के बारे में सोचा."

Image caption सुलेमान बख़ित की चित्रकथाएं जॉर्डन में बेहद सफल हैं

सुलेमान बख़ित ये सुनिश्चित कर लेना चाहते थे कि उनके किरदार बच्चों के बीच लोकप्रिय हो सकें.

उनकी चित्रकथाएं जॉर्डन में बेहद क़ामयाब रही थीं. उन्होंने बताया,''मैंने कहानियों के लिए बच्चों से बात की और उनके विचारों को समझते हुए कहानी को आकार दिया.''

हालांकि बुर्क़ा पहनने वाले एक पात्र को लेकर वो तब तक कोई फ़ैसला नहीं कर सके थे जब तक कि उन्होंने कुछ ख़ास लोगों को उसका कार्टून किरदार दिखा नहीं दिया.

उन्होंने बताया,''लोगों को ये विचार बहुत पसंद आया और इस तरह बुर्क़ा वाले किरदार का जन्म हुआ.''

सुलेमान बख़ित अब चित्रकथाओं के इस प्रोजेक्ट को पाकिस्तान ले जाना चाहते हैं जहां चरमपंथ लगातार बढ़ती हुई समस्या है.

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