बदल रही है याददाश्त

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Image caption दुनिया भर में लोग जानकारी के लिए तेज़ी से इंटरनेट की सहायता ले रहे हैं.

इंटरनेट के ज़माने में क्या आपको नहीं लगता कि आपकी याददाश्त थोड़ी कमज़ोर हो गई है.

अब आप सोचेंगे इंटरनेट का याददाश्त से क्या संबंध हैं. एक बार फिर सोचिए आखिरी बार जब आप किसी सवाल का जवाब नहीं दे पाए थे तो क्या आपने इंटरनेट नहीं खोला था.

एक बार फिर सोचिए कि कुछ वर्षों पहले तक आपको कई फोन नंबर याद रहते थे लेकिन अब संभवत घर के नंबर छोड़कर आपको शायद ही कोई और नंबर याद हो.

और अगर आपको लगता है कि याददाश्त सच में थोड़ी कम हुई है तो मान लीजिए कि आपको सही लग रहा है क्योंकि एक शोध में यह बात सामने भी आ गई है.

एक नए शोध के अनुसार आम तौर पर स्मार्टफोन और इंटरनेट का अधिक इस्तेमाल करने वाले लोग अपनी याददाश्त के लिए इंटरनेट पर ही भरोसा करते हैं.

जाने माने वैज्ञानिक डॉ बेट्सी स्पैरो को ये ख़्याल एक दिन एक पुरानी फ़िल्म देखते हुए उस समय आया जब स्पैरो को फ़िल्म की अभिनेत्री का नाम ही याद नहीं आया.

स्पैरो को समझ में आया कि असल में हम कई तरह की जानकारी के लिए दूसरे लोगों पर (विशेषज्ञ) भरोसा करते हैं मसलन, दोस्त, रिश्तेदार इत्यादि लेकिन इंटरनेट के ज़माने में यह भरोसा सर्च इंजनों पर चला गया है.

डॉ स्पैरो ने इस मामले में कई परीक्षण किए और उन्हीं का सार विज्ञान की जानी मानी पत्रिका जर्नल में छपा है.

इस शोध के अनुसार लोग अब उन जानकारियों का याद नहीं रखते हैं जिनके बारे में उन्हें लगता है कि वो इसे दोबारा खोज सकते हैं जिसका अर्थ हुआ कि हमारी याद रखने की प्रक्रिया बदल रही है बदलती हुई तकनीक के साथ.

शोध इस बात पर भी सवाल खड़े करता है कि अगर इंटरनेट या किसी और माध्यम से आ रही जानकारियां ऑफलाइन हो जाएं तब लोग क्या करेंगे क्योंकि इंटरनेट लोगों के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

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