नासा का खोजी यान वेस्टा की कक्षा में

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Image caption नासा के खोजी यान ने वेस्टा क्षुद्रग्रह की कक्षा में प्रवेश किया

डॉन खोजी यान वेस्टा नामक क्षुद्रग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया है.

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के इस रोबॉटिक उपग्रह ने रविवार को ये जानकारी भेजी कि वह 530 किलोमीटर चौड़े इस क्षुद्रग्रह का चक्कर लगा रहा है.

इस खोजी उपग्रह को वेस्टा तक पहुंचने में चार साल का समय लगा और ये एक साल तक इस विशाल चट्टान का अध्ययन करेगा और उसके बाद सेरेस नामक नन्हे ग्रह की ओर बढ़ जाएगा.

वेस्टा का आकार फ़ूंक निकली फ़ुटबॉल जैसा है. समझा जाता है कि करोड़ों साल पहले इसकी टक्कर हुई थी जिसकी वजह से इसका दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र टूट कर अलग हो गया.

नासा के प्रशासनिक अधिकारी चार्ल्स बोल्डन ने एक बयान में कहा, "ये अन्वेषण का एक अभूतपूर्व मील का पत्थर है जिसमें पहली बार हमारा अंतरिक्षयान क्षुद्रग्रहों की प्रमुख पट्टी के एक पिंड की कक्षा में दाख़िल हुआ है".

उन्होने कहा, "डॉन द्वारा किया जाने वाला अध्ययन एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि है. यही नहीं ये भावी नए ठिकानों की ओर इशारा करता है जहां आने वाले सालों में लोग यात्रा कर सकेंगे".

"अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नासा को निर्देश दिए हैं कि वो 2025 तक एक क्षुद्रग्रह तक अपने अंतरिक्षयात्री भेजे और डॉन उसी के लिए जानकारी इक्ट्ठा करने के लिए भेजा गया है".

वेस्टा क्षुद्रग्रह की खोज 1807 में हुई थी. मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच की पट्टी में चक्कर लगा रही चट्टानों में पहचाना गया ये चौथा क्षुद्रग्रह है.

डॉन जुटाएगा जानकारी

डॉन खोजी यान वेस्टा से कई हज़ार किलोमीटर दूर चक्कर लगाएगा लेकिन धीरे धीरे ये दूरी कम होती जाएगी.

इस मिशन के वैज्ञानिकों को आशा है कि ये वेस्टा की सतह से 200 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच जाएगा लेकिन वो अनावश्यक ख़तरे नहीं उठाना चाहते.

प्रमुख खोजकर्ता क्रिस रसल ने बीबीसी को बताया, "हम वेस्टा के जितना नज़दीक जा सकेंगे जाने की कोशिश करेंगे लेकिन अगर डॉन दुर्घटनाग्रस्त हो गया तो नासा बहुत नाराज़ होगा".

क्षुद्रग्रहों का अध्ययन करने से सौर मंडल के आरंभिक दिनों का अनुमान लगाया जा सकता है. ये माना जाता है कि ये विशाल चट्टानें ग्रहों के निर्माण के बाद का बचा हुआ कचरा है.

वेस्टा और सेरेस इस दृष्टि से बड़े रोचक आकाशीय पिंड हैं. ये पहले बहुत गर्म हुए और उसके बाद उनमें परतें बनीं.

डॉ रसल कहते हैं, "हमारे विचार में वेस्टा का केंद्र धातु का बना है, यानि लोहे का और उसके चारों ओर सिलिकेट की चट्टानें हैं".

"कालांतर में कोई अन्य पिंड उसके निचले हिस्से से जा टकराया जिसकी वजह से बहुत सा पदार्थ छिटक कर अगल हो गया. इसमें से कुछ पदार्थ पृथ्वी के वायुमंडल में खिंचा चला आता है. पृथ्वी पर आकर गिरने वाले 20 में से एक उल्कापिंड वेस्टा का होता है".

सेरेस का व्यास 950 किलोमीटर है और ये क्षुद्रग्रहों की पट्टी का सबसे बड़ा पिंड है लेकिन वेस्टा की तरह विकसित नहीं हुआ.

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसमें बहुत सा पानी है जो सतह के भीतर बर्फ़ की तहों के रूप में मौजूद है.

खोजी यान डॉन अगले कुछ महीनों में वेस्टा की सतह का नक्शा तैयार करेगा.

इस यान में ऐसे उपकरण लगे हैं जो वेस्टा की चट्टानों में खनिजो और अन्य तत्वों की खोज करेंगे.

ये यान भूगर्भीय प्रक्रियाओं के प्रमाण भी जुटाएगा.

वैज्ञानिकों का दल ये जानना चाहता है कि किस तरह समय के साथ वेस्टा की सतह में परिवर्तन आए.

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