यौन क्रिया के बिना प्रजनन

कीड़ा

कनाडा के वैज्ञानिकों के अनुसार तिमेमा नाम के कीड़े यौन क्रिया के बिना ही पिछले दस लाख साल से प्रजनन कर रहे हैं.

वैज्ञानिकों ने तिमेमा नामक इस कीड़े के डीएनए की जांच की, जो अमरीका के पश्चिमी तट के आसपास के झाड़ झंकाड़ वाले इलाक़े में रहते हैं.

उन्होंने इन कीड़ों की दो प्रजातियों की प्राचीन वंशावली ढूंढी और पाया कि ये कीड़े अलैंगिक प्रजनन करते रहे हैं.

ये खोज शोधकर्ताओं को ये समझने में मदद करेगी कि यौन क्रिया के बिना जीवन कैसे संभव है.

शोध

कनाडा के साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध के परिणाम करंट बायलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित किए हैं.

तिमेमा कीड़ों की कुछ प्रजातियां अलैंगिक प्रजनन करती हैं जिसमें मादा कीड़े के अंडों को नर कीड़ों की ओर से निषेचन की ज़रूरत नहीं पड़ती. वो अकेली ही नन्हे कीड़ों को जन्म देती हैं.

डॉ. तान्या श्वांडर और उनकी टीम ने यह जानने के लिए कि प्रजनन की ये प्रक्रिया कब से चल रही है, इन कीड़ों का अध्ययन किया.

उनके डीएनए की जांच करने पर उनकी प्राचीन वंशावली का पता लगा और ये पहचान संभव हुई कि ये कीड़े कब एक अलग प्रजाति के रूप में विकसित हुए.

टीम ने खोज की कि पांच अलैंगिक प्रजातियां पांच लाख साल पुरानी थीं और दो उनसे भी अधिक पुरानी.

डॉ श्वांडर ने बीबीसी को बताया, "सभी सबूत इस ओर इशारा करते हैं कि तिमेमा ताहो और तिमेमा जेनिविवे कोई दस लाख सालों से इसी तरह बिना यौन क्रिया के बढ़ते रहे हैं. हमारा शोध इस प्रमाण को मज़बूत करता है कि अलैंगिकता हमेशा किसी प्रजाति के विलुप्त होने का कारण नहीं बनती.".

अलैंगिक उत्तरजीविता

हाल के कई अध्ययनों से ये पता चला है कि कई जीव अलैंगिक होते हुए भी बढ़ते रहे हैं.

अलैंगिकता के कुछ लाभ हैं क्योंकि इससे आबादी तेज़ी से बढ़ती है लेकिन क्योंकि इस प्रक्रिया में जीन की बार बार क्लोनिंग होती है या दूसरे शब्दों में उनकी प्रतिकृतियां तैयार होती हैं इसलिए इसके पीढ़ी दर पीढ़ी कुछ नकारात्मक परिणाम भी होते हैं.

प्रतिकृति का मतलब ये हुआ कि इन प्रजातियों में नए परिवेश के साथ समायोजन करने की क्षमता कम होती जाती है.

लेकिन इसके बावजूद तिमेमा कीड़े लाखों सालों से जीवित हैं.

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