'जांच से बच सकती है शिशुओं की जान'

नवजात शिशुओं में ह्रदय रोग की जांच
Image caption नवजात शिशुओं में ह्रदय रोग की जांच का आसान तरीक़ा

ब्रिटेन में डॉक्टरों का कहना है कि एक आसान और सस्ती सी जांच से जन्मजात ह्रदय रोग के शिकार शिशुओं की जान बचाई जा सकती है.

मेडिकल साइंस की जानी मानी पत्रिका 'द लैंसेट' में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 20055 नवजात शिशुओं पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि बच्चों के ख़ून में ऑक्सीजन की जांच दूसरी जांच से ज़्यादा सफल रही है.

शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के सभी अस्पतालों में नवजात शिशुओं के ऑक्सीजन जांच की सिफ़ारिश की है.

ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन ने कहा है कि ख़ून की जांच से सचमुच में फ़र्क़ पड़ेगा क्योंकि बहुत सारे मामलों का पता ही नहीं चलता है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ हर 145 नवजात शिशुओं में से एक शिशु ह्रदय में सुराख़ जैसी जन्मजात बीमारियों का शिकार होता है.

उन बीमारियों का पता गर्भावस्था में मां के अल्ट्रासाउंड या पैदा होने के बाद शिशु के ह्रदय चाप को सुनकर लगाया जाता है. लेकिन इनमें सफल होने की दर बहुत कम है.

'पल्स ऑक्सीमीटर'

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Image caption ख़ून में ऑक्सीजन की मात्रा की जांच के लिए एक ज़माने से ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल किया जा रहा है.

ब्रिटेन के छह अस्पतालों में डॉक्टरों ने ख़ून में ऑक्सीजन की मात्रा की जांच के लिए 'पल्स ऑक्सीमीटर' का इस्तेमाल किया. 'पल्स ऑक्सीमीटर' की तकनीक पिछले 20 साल से इस्तेमाल की जा रही है.

ख़ून में ऑक्सीजन की मात्रा कम या हाथ और पैर में ऑक्सीजन की मात्रा में फर्क़ पाए जाने पर उनकी और गहन जांच की गई.

इस जांच को करने में पांच मिनट से भी कम समय लगता है और लगभग 75 प्रतिशत गंभीर अनियमितताओं का पता लगा लिया है.

दूसरे पारंपरिक तरीक़ों से लगभग 92 प्रतिशत मामलों का पता चल जाता है.

हालांकि कुछ ख़ामियां ऐसी होती हैं, जिनका ऑपरेशन नहीं हो सकता है. लेकिन चिकित्सा में इतनी प्रगति हो गई है कि ज़्यादातर बीमारियों को ठीक किया जा सकता है.

बर्मिंघम विश्वविधालय में मुख्य शोधकर्ता डॉक्टर एंड्रयू इवर ने ब्रिटेन के सभी अस्पतालों में ये जांच करने का कहा है.

उनका कहना है, ''ये जांच मौजूदा स्क्रीनिंग सिस्टम में और बेहतरी लाता है और नवजात शिशुओं में जन्मजात ह्रदय रोग के मामलों की पहचान में बहुत उपयोगी हो सकता है.''

ब्रिटेन में राष्ट्रीय स्क्रीनिंग कमेटी के डॉक्टर डेविड एलिमैन ने कहा कि शिशुओं के लिए स्क्रीनिंग प्रोग्राम की समीक्षा हो रही है और ये नया रिसर्च उस समीक्षा का एक अभिन्न हिस्सा होगा.

ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन में एक वरिष्ठ नर्स एमी थॉमसन ने कहा कि शिशुओं की जान बचाने के लिए सबसे ज़रूरी है कि रोग का पहले पता चल जाए.

एमी ने कहा कि ह्रदय रोग के साथ पैदा होने वाले सारे शिशु कोई ख़ास प्रतीक नहीं छोड़ते, इसलिए उनका पता नही चल पाता है. यह शोध बहुत आशाजनक है जो ये दिखाता है कि किस तरह एक आसान सी जांच ह्रदय रोग की पहचान में मदद कर सकती है.

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