मोबाइल फोन से त्रासदी में सहायता

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Image caption हैती में भूकंप के बाद राहत कार्य में मदद के लिए डिजीसेल मोबाइल कंपनी से जानकारी ली गई थी.

एक नए शोध के मुताबिक प्राकृतिक आपदा से बच कर भाग रहे लोगों के मोबाइल फोन के ज़रिए उन्हें सहायता राशि पहुंचाने में मदद मिल सकती है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2010 में हैती में आए भूकंप के दौरान वैज्ञानिकों ने बीस लाख लोगों के मोबाइल के ज़रिए उनकी गतिविधियों की जानकारी हासिल की.

इसी के बल पर राहत संस्थाओं ने उन इलाकों का चुनाव किया जहां सबसे ज़्यादा लोग जुट रहे थे और वहीं सहायता सामग्री भेजी.

वर्ष 2010 में हैती में भूकंप आने के फौरन बाद कई लोग राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस छोड़ कर भाग गए.

स्वीडन के कैरोलिन्स्का संस्थान और अमरीका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने हैती की सबसे बड़ी मोबाइल सेवा कंपनी डिजिसेल से सभी फोन टावरों की जानकारी ली.

इस जानकारी के ज़रिए ये अनुमान लगाया गया कि क़रीब छह लाख लोगों ने पहले 19 दिनों में राजधानी छोड़ दी थी और वो किन इलाकों में जमा थे.

वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन की जानकारी राहत कर्मियों को दी ताकि वे सहायता राशि सही जगह पर सही समय पहुंचा पाएं.

उपयोगिता

उसी साल जब हैती में हैज़ा फैला तब शोधकर्ताओं ने इसी तकनीक का फायदा उठाया.

कैरोलिन्स्का संस्थान के लिनस बेंगसन ने बताया, “हमें बहुत जल्द ही लोगों के मोबाइल फोन की जानकारी मिलने लगी, बारह घंटे के भीतर ही हम ये बताने की स्थिति में थे कि कौनसे इलाकों में लोग इकट्ठा हो रहे थे.”

डॉक्टर बेंगसन के मुताबिक इस तकनीक को दुनिया के किसी भी हिस्से में इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि अब 86 प्रतिशत लोग मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं.

हालांकि उन्होंने लिबिया में विद्रोह जैसी हिंसक परिस्थितियों में इसके कार्यान्वन पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में हर गुट का अपना निहित स्वार्थ हो सकता है और मोबाइल कंपनियां जानकारी देने में झिझक सकती हैं क्योंकि वो असुरक्षित महसूस करती हैं.

वहीं डॉक्टर बेंगसन का मानना था कि प्राकृतिक आपदा में सभी का लक्ष्य पीड़ितों की मदद करना ही होगा.

शोधकर्ता अब एक संस्था स्थापित कर रहे हैं ताकि आने वाले समय में किसी भी आपदा की स्थिति में इस तकनीक का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके.

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