प्रति टन कार्बन प्रदूषण के लिए 23 डॉलर

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ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने कार्बन कर से जुड़ी योजना संसद में पेश की है. सरकार का मानना है कि इससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलेगी. लेकिन इसे लेकर काफ़ी मतभेद भी हैं.

शुरुआती योजना के मुताबिक प्रदूषण फैलाने वाली टॉप 500 कंपनियों पर प्रति टन कार्बन प्रदूषण के लिए 23 डॉलर की फ़ीस लगाई जाएगी.

जूलिया गिलार्ड के मुताबिक प्रति व्यक्ति के हिसाब से ऑस्ट्रेलिया विश्व में सबसे ज़्यादा प्रदूषक देशों में से एक है और इसे बदलना ज़रूरी है.

हालांकि कार्बन टेक्स का प्रस्ताव काफ़ी विवादित माना जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया में शायद ही किसी कर को लेकर इतना विवाद हुआ है.

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री पर आरोप है कि वे कार्बन कर पर अपने रुख़ से पलट गई हैं. कहा जा रहा है कि चुनाव से पहले वे इस टेक्स के ख़िलाफ़ थीं.

उन्होंने संसद में विपक्ष की इस बात का खंडन किया है कि कार्बन टेक्स को लागू करना मुश्किल होगा.

जूलिया गिलार्ड का कहना था, "कार्बन प्रदूषण को कम किया जा सकता है. साथ-साथ हम अपनी अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ा सकते हैं. सरकार क़दम उठाएगी. संसद को इसका समर्थन करना चाहिए."

सरकार को उम्मीद है कि वो कार्बन उत्सर्जन कम कर लेगी. लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता टोनी अबॉट का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में कार्बन उत्सर्जन का स्तर चीन और अमरीका से कम है और कार्बन कर से नौकरियों पर असर पड़ेगा.

उन्होंने कहा, "मैं संसद में लेबर पार्टी के सदस्यों से कहना चाहूँगा कि आप लोगों की नौकरियों के बारे में भी सोचे. जब आप कार्बन टेक्स पर वोट डालें तो प्रधानमंत्री और उनके राजनीतिक हितों के बारे में न सोचें. बल्कि लोगों के आर्थिक हितों के बारे में सोचे."

कार्बन कर के ख़िलाफ़ हज़ारों लोगों ने रैलियों में हिस्सा लिया है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नवंबर में संभवत ये क़ानून बन जाएगा.

कुछ लोग इस कर को पर्यावरण के लिए एक जीत के रूप में देख रहे हैं तो विरोधी इसे एक महंगा और ग़ैर ज़रूरी बोझ मान रहे हैं.

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