मेढ़कों की 12 नई प्रजातियों की खोज

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Image caption भारतीय वैज्ञानिकों ने मेढ़कों की 12 नई प्रजातियां खोजी हैं.

भारत के वैज्ञानिकों ने मेढ़कों की 12 नई प्रजातियों की पहचान करने में सफलता प्राप्त की है जबकि उन तीन प्रजातियों को खोज निकाला है जो लुप्त बताई जा रही थीं.

इस शोध दल के प्रमुख वैज्ञानिक सत्यभामा बीजू ने बताया कि ये सभी नई प्रजातियां भारत के पश्चिमी घाटों वाले इलाक़े में मिली हैं और ये सभी लुप्तप्राय प्रजातियां हैं.

नई प्रजातियों में वो मेढक भी है जिसका टर्राना बिल्ली की आवाज़ से मिलता जुलता है. एक अन्य प्रजाति का मेढ़क भी खोजा गया है जो क्रिकेट के गेंद जितना बड़ा हो सकता है.

अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ज़ूटेक्सा में शोध के अंश छपे हैं.

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन नए प्रजातियों का पता लगने से पर्यावरण के हालात के बारे में और भी नई जानकारियां सामने आ सकेंगी.

दुनिया भर में ज़मीन और पानी में रहने वाली प्रजातियों का 32 प्रतिशत खतरे में हैं क्योंकि उनके रहने की जगहें खत्म होती जा रही हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय के बायोलॉजिस्ट सत्यभामा बीजू कहते हैं, ‘‘ पर्यावरण में बदलाव के बारे में जानकारी पाने के लिए मेढ़कों से बड़ा संकेत कोई उपलब्ध नहीं करता. ये हमें पर्यावरण के प्रदूषण के बारे में भी जानकारी देता है.’’

बीजू कहते हैं कि भारत में बड़े और करिश्माई जानवरों के संरक्षण के लिए बहुत काम हो रहा है लेकिन मेढ़क जैसे महत्वपूर्ण जानवरों के संरक्षण की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है.

वो कहते हैं, ‘‘ मेढ़कों या जल-ज़मीन पर रहने वाले जंतुओं में भारत में किसी को रुचि नहीं हैं. मेढ़कों पर शोध के लिए पैसे तक उपलब्ध नहीं है जबकि बाघों के संरक्षण के लिए काफी काम हो रहा है.’’

पश्चिमी घाटों के जंगलों में रात रात भर बारिश में समय बिताने के बाद ही टीम इन नई प्रजातियों को खोज पाई है.

नई प्रजातियों में कई मेढ़क ऐसे हैं जो सिर्फ रात में निकलते हैं.

वायनाड मेढ़क के बारे में बीजू बताते हैं, ‘‘ ये तो मेढ़कों में दैत्य जैसा है. क्रिकेट बॉल इतना बड़ा हो जाता है ये मेढ़क और एक पत्थर से दूसरे पर उछलता रहता है.’’

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