मंगल के चाँद से नमूने लाएगा रूसी यान

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रूस ने मंगल ग्रह के चाँद ‘फ़ोबोस’ से चट्टानों और धूल के नमूने इकट्ठा कर उन्हें धरती पर लाने के लिए नया अभियान लॉन्च किया है.

इन नमूनों के अध्ययन से 27 किलोमीटर चौड़े चाँद के बारे में नई जानकारी मिल सकती है कि ये कैसे बना. कई वैज्ञानिकों को आशंका है कि ये चाँद नहीं बल्कि एक एस्टेरॉयड है.

रूसी अंतरिक्ष यान मंगल पर अगले साल सितंबर में पहुँचेगा. अभियान का नाम फ़ोबोस-ग्रंट है. रूसी भाषा में ग्रंट का मतलब मिट्टी है.

ये एक महत्वपूर्ण अभियान है क्योंकि इसमें मंगल ग्रह के लिए चीन का पहला उपग्रह यिंगहुओ भी है.

माना जा रहा है कि मंगल से लिए नमूने धरती पर 33 महीनों में पहुँच जाएँगे.

रूस को उम्मीद है कि नया मिशन सफल रहेगा और मंगल से जुड़े उसके असफल अभियानों के सिलसिले को तोड़ेगा.

1960 के बाद से रूस मंगल पर 16 अभियान भेज चुका है लेकिन कोई भी अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है.

फ़ोबोस-ग्रंट एक भारी भरकम अंतरिक्ष यान है. मंगल के चाँद पर उतरने, नमूने इकट्ठा करने और धरती पर भेजने के लिए यान को कई क्रमों से गुज़रना होगा.

मंगल के चाँद पर पहुँचने के बाद एक रोबोटिक बाजू मिट्टी के नमूने इकट्ठा करेगी. कुछ नमूनों का विश्लेषण वहीं कर लिया जाएगा लेकिन क़रीब 200 ग्राम मिट्टी एक डिब्बे में बंद कर धरती पर भेजी जाएगी.

लेकिन चाँद पर पहुँचने के कुछ दिनों के भीतर ही ये डिब्बा धरती की ओर भेज देना होगा. अगर सब ठीक रहा तो अगस्त 2014 तक ये डिब्बा कज़ाख़स्तान के रेगिस्तान में गिरेगा.

मंगल ग्रह पर दो चाँद हैं- फ़ोबोस और डाइमोस. फ़ोबोस आलू के आकार का है और इसका घनत्व काफ़ी कम है.

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