रूसी अंतरिक्ष यान अभी तक लापता

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Image caption फ़ोबोस ग्रंट का उद्देश्य मंगल ग्रह के चाँद फ़ोबोस पर उतरना और वहा से चट्टानों के नमूने लेकर पृथ्वी वापस आना था.

रास्ता भटक कर पृथ्वी का चक्कर काट रहे रुसी अंतरिक्ष मिशन को पटरी पर लाने के लिए प्रयास जारी है. रूसी अंतरिक्ष यान को शोध के लिए मंगल ग्रह पर जाना था.

फ़ोबोस ग्रंट यान को बुधवार को अंतरिक्ष कक्ष के लिए पृथ्वी से छोड़ा गया था लेकिन आकाश में जाने के बाद उसके इंजन में ख़राबी आ गई थी.

रुसी इंजीनियरों का समूह फ़ोबोस ग्रंट यान से सम्पर्क स्थापित करने के लिए दुनिया भर के अंतरिक्ष ट्रैकिंग स्टेशनों से बातचीत कर रहा है. हालाकि इस काम में इंजीनियरों को अभी तक कोई खास सफलता नही मिल पाई है.

दूसरे यूरोपीय देशों ने भी रूस की मदद करने की पेशकश की है.

जर्मनी के डार्मस्टैड में स्थित यूरोपीयन स्पेस एजेंसी स्पेसक्राफ्ट ऑपरेशन्स सेंटर (ईसोक) खोए रूसी अंतरिक्ष यान को खोजने के लिए फ़्रांस के गाइना, कैनरी द्वीप, और स्पेन में लगे अपने उपकरणों की मदद ले रहा है.

अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) ने भी रूस को मदद की पेशकश की है.

नासा के मंगल ग्रह की मिशन के निदेशक डग मैक क्विसशन ने पत्रकारों से कहा, “हमने मदद की पेशकश की है, अगर वो(रूस) चाहे तो हम हर संभव मदद करेंगे.”

फ़ोबोस ग्रंट यान को बैकोनूर अंतरिक्ष स्टेशन से ज़ेनिट रॉकेट के ज़रिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था.

अंतरिक्ष कक्ष में स्थापित होने के बाद फ़ोबोस ग्रंट यान को मंगल ग्रह तक पहुँचने के लिए दो इंजन चालू करने थे.

इनमें से एक इंजन यान को ऊपर ले जाने वाला था और दूसरा इंजन इसे मंगल ग्रह की तरफ़ ले जाने वाला था, लेकिन दोनो में से एक भी इंजन चालू नही हो पाया.

सम्पर्क

रूस के इंटरफ़ैक्स न्यूज़ एजेंसी ने शुक्रवार को सूत्रों के हवाले से कहा, “फ़ोबोस ग्रंट अंतरिक्ष यान से समपर्क करने के लिए रात-दिन कोशिशें की जा रही है लेकिन सफलता नही मिल पाई है.”

सूत्रो मे मिली जानकारी के मुताबिक़ रूसी अंतरिक्ष यान के बचने की उम्मीद बहुत कम है.

हालाकि नागरिक सैटेलाइट ट्रैकरों के समूह के मुताबिक़ फ़ोबोस ग्रंट यान की हालत स्थिर है.

डेटन, ऑहायो के माइकल मर्फ़ी के मुताबिक़ निरिक्षण करते समय उन्होने फ़ोबोस ग्रंट यान को देखा. उनके अनुसार यान के आगे बढ़ते वक़्त उसका रॉकेट धीमे-धीमे हिल रहा था.

संभावना जताई जा रही है कि अगर फ़ोबोस ग्रंट यान से सम्पर्क नही हो पाया तो फिर इसका पृथ्वी पर गिरना तय है.

माना जा रहा है कि पृथ्वी से 200 किलोमीटर की ऊँचाई पर आने के बाद यान पृथ्वी की तरफ़ और तेज़ी से आकर्षित होगा, लोकिन ऐसा होने में कुछ हफ़्तों का समय बाक़ी है.

लॉचिंग के समय फ़ोबोस ग्रंट यान का वज़न 13 टन था, जो कि नासा की नई यूएआरएस सैटेलाइट से दोगुना भार है.

लैडिंग साईट

फ़ोबोस ग्रंट यान के अंतरिक्ष में खो जाने की हालत में अंतरिक्ष वैज्ञानिक और शोधकर्ता यान के क्षय की स्थिति के अवलोकन करेंगी. वो पता लगाने की कोशिश करेंगे कि यान पृथ्वी पर कब और कहा गिरेगा.

नासा के अंतरिक्ष यान यूएआरएस की ही तरह फ़ोबोस ग्रंट का ज़्यादातर भाग अंतरिक्ष में ही जल जाएगा लेकिन कुछ धातुगत पदार्थों के धरती तक पहुँचने की संभावना फ़िर भी है.

ऐसे ज़्यादातर मामलो में यान की ईधन टंकी सलामत बची रह जाती है. टंकी की गोलाकार संरचना तेज़ गर्मी भी झेल जाती है.

लेकिन संभावना जताई जा रही है कि पृथ्वी का 70 फ़ीसदी भाग जल होने के कारण यान का अवशेष किसी समुद्र में ही गिरेगा.

अमरीकी यान यूएआरएस और जर्मनी की रोसैट एक्स-रे टेलीस्कोप भी समुद्र में ही गिरी थी.

हालाकि लोग चाहते है कि फ़ोबोस ग्रंट यान का अंत ऐसा ना हो. मंगल ग्रह पर शोध करने निकले इस यान को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक उत्साहित थे.

फ़ोबोस ग्रंट का उद्देश्य मंगल ग्रह के चाँद फ़ोबोस पर उतरना और वहा से चट्टानों के नमूने लेकर पृथ्वी वापस आना था.

यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योकिं इसके ज़रिए मंगल ग्रह के लिए चीन का पहला सैटेलाइट यिंगहूँ-एक को भी प्रक्षेपित किया जाना था.

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