‘एंटीबायोटिक नहीं है सर्दी ज़ुक़ाम का इलाज’

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Image caption डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि एंटीबायोटिक लेने से शरीर के प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ सकता है

ब्रिटेन में स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी की ओर से कराए गए एक सर्वेक्षण में पता चला है कि एक चौथाई लोग मानते हैं कि एंटीबायोटिक से हर तरह की खांसी और ज़ुक़ाम का इलाज हो सकता है.

हालाँकि तथ्य यह है कि एंटीबायोटिक का उन वायरसों पर कोई असर नहीं होता, जो आमतौर पर श्वास नली में संक्रमण की वजह होते हैं.

ब्रिटेन में 1800 लोगों पर किए गए इस सर्वेक्षण से ये भी पता चला है कि हर दस में से एक व्यक्ति बीमारी से मुक्ति के बाद बची हुई एंटीबायोटिक दवाईयाँ रख लेता है और ज़रूरत पड़ने पर बिना डॉक्टर से पूछे उसका सेवन करता है.

जबकि डॉक्टरों का मानना है कि एंटिबायोटिक हर बीमारी का इलाज नहीं है.

ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी की डॉक्टर क्लिओडन मैकनल्टी का कहना है कि डॉक्टर से बिना पूछे दवाई लेना ठीक नहीं है और इससे मरीज़ के शरीर पर दवाइयों के बेअसर हो जाने का ख़तरा होता है.

सर्वेक्षण

सर्वेक्षण में शामिल लोगो में से 500 लोगों को पिछले साल एंटीबायोटिक दवाईयाँ लेने की हिदायत दी गई थी. इनमें से 11 फ़ीसदी लोगों का कहना है कि उनके पास बची हुई दवाईयाँ रखी हुई हैं.

छह प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें संक्रमण होने पर वह एंटीबायोटिक दवाईयाँ खुद ही ले लेंगे.

यूरोपीय एंटीबायोटिक जागरूकता दिवस पर डॉक्टर मैकनल्टी ने बताया कि ब्रिटेन में हर साल क़रीब 30 फ़ीसदी लोग एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन करते हैं.

डॉक्टर मैकनल्टी के मुताबिक़ एंटीबायोटिक दवाओं की अधिकता से मरीज़ पर उनके बेअसर होने की आशंका बढ़ जाती है और एंटीबायोटिक से डायरिया होने का भी ख़तरा बना रहता है.

सर्वेक्षण के अनुसार 70 फ़ीसदी लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं की अधिकता से उनके बेअसर हो जाने की जानकारी थी.

'एंटीबायोटिक ज़ुक़ाम का इलाज नहीं'

ब्रिटेन की स्वास्थ सुरक्षा एजेंसी के अनुसार डॉक्टरों को भी मरीज़ों की तरफ़ से एंटीबायोटिक दवाईयों की ग़ैरज़रुरी मांग को मना करना चाहिए.

सर्वेक्षण में पाया गया कि जिन लोगों ने डॉक्टरों से एंटीबायोटिक दवाइयाँ मांगी उस में से 97 फ़ीसदी लोगों ये दवाइयां दे दी गईं.

डॉक्टर मैकनल्टी ने कहा कि कई वर्षों से लोगों के बीच एंटीबायोटिक दवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के बावजूद इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि यह भ्रम लोगो में अभी तक बरक़रार है.

उन्होंने कहा, "हमें पता है कि सर्दी, खांसी और ज़ुक़ाम हो जाने पर लोग परेशान हो उठते हैं लेकिन ज़्यादातर मामलों में यह ख़ुद ही ठीक हो जाता है."

ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज की अध्यक्ष डॉक्टर क्लेअर गेरेडा का कहना है, "एंटीबायोटिक दवाइयों को ग़लत तरीक़े से इस्तेमाल करने पर मरीज़ को फ़ायदे की जगह नुक़सान पहुँच सकता है. उसकी प्रतिरोधक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ सकता है."

कई डॉक्टरों का मानना है कि एंटीबायोटिक दवाइयों के अत्यधिक प्रयोग से जीवाणुओं के नए प्रकार में उभरने का भी वैश्विक खतरा है.

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