नासा का क्यूरियोसिटी मंगल ग्रह की ओर रवाना

अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनिवार को मंगल ग्रह पर अब तक का अपना सबसे उत्कृष्ट रोबोटिक रोवर को भेज दिया है.

रोबोटिक रोवर क्यूरियोसिटी को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से एक एटलस रॉकेट के ज़रिये अंतरिक्ष में भेजा गया.

'रोबोटिक रोवर' यानी रोबोट के समान एक मशीन है जो अंतरिक्ष में जाकर मंगल के चारों ओर घूमेगी.

ये एक बड़ी गाड़ी के आकार का घूमने वाला वाहन है.

छह चक्कों वाले इस मोबाइल लेबॉरेटरी रोबोटिक रोवर का नाम क्यूरियोसिटी रखा गया है और इसका वज़न करीब एक टन है.

क्यूरियोसिटी को 'मार्स साइंस लैबोरेटरी' (एमएसएल) के नाम से भी जाना जाता है.

जीवन की तलाश

क्यूरियोसिटी मंगल पर भेजे गए पूर्व के रोवर से पांच गुना भारी है, और इसके पास चूर हो चुके चट्टान नमूनों की जांच करने की क्षमता है.

क्यूरियोसिटी का मुख्य काम ये पता करना है कि क्या कभी मंगल ग्रह पर जीवन मौजूद था.

ये मंगल ग्रह से मिट्टी के सैंपल इकट्ठा करेगा और कैमरे से इस ग्रह के सतह को स्कैन भी किया जाएगा.

इसमें प्लूटोनियम बैटरी है जिससे इसे दस साल से भी ज़्यादा समय तक लगातार ऊर्जा मिलती रहेगी.

ये रोवर अगस्त 2012 में मंगल पर पहुंचेगा और यदि ये सफलतापूर्वक मंगल की सतह पर उतर गया तो ये रोवर दो वर्ष के अपने मिशन के दौरान इस बात की जांच करेगा कि क्या वहां का वातावरण सूक्ष्म जीवों के विकास के लिए अनुकूल है या नहीं.

'क्यूरियोसिटी ' प्रोजेक्ट के प्रबंधक पीट थिसिंगर ने कहा," हमारा अंतरिक्ष यान पूरी तरह से फिट है और मंगल के सफ़र पर है."

नासा के मंगल अभियान के निदेशक ने कहा "हमने न सिर्फ तकनीकि रूप से बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी एक नए युग की शुरूआत की है. जब ये मंगल की घरती पर उतरेगा तो हमें यकीन है कि हमें ऐसे चित्र और दृष्य दिखाई देंगे जो हमने पहले कभी भी नही देखे."

प्रेक्षेपण के 50 मिनट बाद नासा का यान से पहला संपर्क भी स्थापित हुआ है.

इस पूरे मिशन का कुल खर्च ढाई अरब डॉलर है.

संबंधित समाचार