भारत में जानलेवा ‘टीडीआर-टीबी’ के मामले

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भारत के मुंबई शहर में पहली बार दवा प्रतिरोधक तपेदिक यानि ‘टोटली ड्रग रेज़िसटेंट लंग टुबरक्लोसिस’ टीडीआर-टीबी के 12 मामले सामने आए हैं.

यह तपेदिक की ऐसी स्थिति है जिसमें कोई भी दवा कारगर नहीं होती और मरीज़ की मृत्यु निश्चित है. टीडीआर-टीबी के ये मामले मुंबई के पीडी हिंदुजा अस्पताल में सामने आए हैं.

इन मरीज़ों के इलाज में जुटे डॉक्टरों के मुताबिक टीडीआर-टीबी के ज़्यादातर मामले गैर अनुभवी डॉक्टरों द्वारा टीबी के मरीज़ों को अलग अलग तरह के एंटिबायोटिक देने से होते हैं जिनके चलते टीबा का जीवाणु दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा कर लेता है.

डॉक्टरों का मानना है कि टीबी के ये मरीज़ जिन लोगों के संपर्क में आते हैं उनमें से कई लोग भी इस विकसित संक्रमण के शिकार हो जाते हैं. इस संक्रमण से पीडी हिंदुजा अस्पताल में एक महिला की मौत भी हो चुकी है.

एक अदृश्य महामारी

हालांकि राज्य सरकार के टीबी निरोधक विभाग का मानना है कि यह टीडीआर-टीबी के मामलों की जांच के लिए मान्यता प्राप्त नहीं है और इसलिए इन मामलों की सत्यता पर विश्वास नहीं किया जा सकता.

ग़ौरतलब है कि पीडी हिंदुजा अस्पताल भारत के उन कुछेक अस्पतालों में से एक है जहां किए जाने वाले तपेदिक से जुड़े परीक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त हैं.

‘एक्ट्रीमली ड्रग रेसिंसटेंट टीबी’ के मामले पहले ही दुनियाभर में चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं और टीबी का ये नवीनतम संक्रमण इसी का घातक रुप है.

भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग टीबी के चलते मौत का शिकार हो जाते हैं. आमतौर पर पिछड़े, ग़रीब और अस्वच्छ इलाकों में पाया जाने वाला टीबी का जीवाणु अब महानगरों में भी तेज़ी से फैल रहा है.

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