'प्रदूषण से दक्षिण एशिया में कोहरा बढ़ा'

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वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जीवाश्म और जैव ईधन की खपत से हवाई प्रदूषण बढ़ने के कारण दक्षिण एशिया में कोहरे का प्रभाव बढ़ा है.

बांग्लादेश, भारत और नेपाल में तापमान गिरा है और धुंध, धुए के बादल आसमान में छा कर कई दिनों तक धूप रोक देते है.

धुंध के चलते हवाई और रेल सेवाओं के बाधित होने के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है.

विशेषज्ञों का कहना है कि उन्होंने पिछले कुछ सालों में गंगा के निकट के इलाक़ों में कोहरा बढ़ा है.

भारतीय मौसम विभाग के निदेशक बीपी यादव ने कहा, ''साल 1990 से उत्तर भारत में कोहरे के प्रभावित दिनों की संख्या बढ़ती जा रही है.''

नेपाल के जलविज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक केशव प्रसाद शर्मा ने सहमति जताते हुए कहा कि भारतीय सीमा से सटे दक्षिणी नेपाल के इलाक़ों में धुंध की समस्या बढ़ी है.

स्वास्थ पर असर

कुछ लोग इस बात की भी जांच कर रहे है कि क्या प्रदूषण और धुंध से इलाक़े के लोगों के स्वास्थ पर भी असर पड़ रहा है. हालांकि शीत लहर के सीधे असर के तौर पर देखे जाने वाली मौतें चिकित्सकों के अनुसार सांस लेने में तकलीफ़ के चलते होती है.

दक्षिण-पूर्वी नेपाल के एक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक गौरंग मिश्रा ने कहा, “हमारे किसी भी मरीज़ की हाईपोथर्मिया से मौत नही हुई.” खबरों के अनुसार इसी इलाक़े में पिछले कुछ दिनों में सबसे ज़्यादा मौते हुई है, कोहरे का असर भी इन्ही दिनों में ज़्यादा था.

डॉक्टर गौरंग मिश्रा ने कहा, ''ज़्यादातर मरीज़ सांसों की बिमारी के ग्रस्त है, जो कि लकड़िया, गोहरी के जलाए जाने और औद्योगिक प्रदूषण के चलते होती है.''

बांगलादेश में भी ऐसे मरीज़ों, खास तौर पर बूढ़ों और बच्चों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है.

'व्यवस्था ठप'

Image caption गाड़ियों को प्रदूषण का मुख्य स्रोत माना जाता है लेकिन कई और भी स्रोत है

बांगलादेश के एक पर्यावरण विशेषज्ञ इक़बाल हबीब ने कहा, ''हमारे देश में ये केवल लोगों की सेहत का मामला नही है, पूरी यातायात व्यवस्था ही कोहरे के कारण ठप हो जाती है.''

विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण के आम स्रोत गाड़ियों, ऑद्यौगिक इकाईयों, बिजली घरों के धुएं के अलावा ईट भट्ठों की संख्या बढ़ने के कारण बांगलादेश में प्रदूषण बढ़ा है.

शोधों के अनुसार बांगलादेश की राजधानी ढाका में ईट भट्ठों से फ़ैल रहा प्रदूषण सभी स्रोतों का 40 फ़ीसदी है.

बांगलादेश की ही तरह भारत में भी सर्दियों में भवन निर्माण के काम ज़ोरों पर होते है.

भारतीय मौसम विभाग के बीपी यादव ने कहा, ''निर्माण कार्यों से प्रदूषण में इज़ाफ़ा होता है जिससे कोहरा बढ़ता है.''

उर्जा की ज़रूरतें

अंतरराष्ट्रीय उर्जा एजेंसी ने वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2010 में कहा, ''वैश्विक उर्जा मांग में बढ़ोत्तरी के पीछे भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है, जो कि कुल मांग बढ़ोत्तरी का 18 फ़ीसदी है.''

वैज्ञानिकों ने कहा प्रदूषण फैलाने वाले पदार्थ हवा की नमी को वायुमंडल में बांध कर घना कोहरा बना देती है.

केशव प्रसाद शर्मा ने कहा, ''हवा में जितना प्रदूषण होगा कोहरा उतना ही घना होगा. नेपाल-भारत की सीमा में अल-शाम कोहरे की घनी चादरें देखी जा सकती है.''

जब कोहरे के चादर सूर्य की रोशनी रोक लेते है तो तापमान में गिरावट होती है और फिर लोग लकड़िया और गोबर से बनी गोहरियां जलाकर अपने को गर्म रखने की कोशिश करते है. इसी से वायु प्रदूषण और फिर कोहरा बढ़ जाता है.

वैज्ञानिकों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या ये है कि सर्दियों के दौरान कोहरा दूसरे मौसमों की तरह ऊपरी वायुमंडल में नही जा पाता और नीचे ही रह जाता है.

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